शहीद-ए-आजम भगत सिंह के जन्मदिवस पर सोमवार को पूर्व मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय हुसैनीवाला बॉर्डर पर स्थित शहीदी स्मारक पर शहीद भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव की समाधि पर फूल अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस मौके पर हरसिमरत कौर ने कहा कि आज फिर से शहीद भगत सिंह की जरूरत है, ताकि मेहनती किसानों और मजदूरों को इंसाफ दिलाया जा सके। इस मौके पर पूर्व सिंचाई मंत्री जनमेजा सिंह सेखों भी मौजूद रहे। इसके बाद हरसिमरत कौर ने गांव वजीदपुर स्थित एतिहासिक गुरुद्वारा जामनी साहिब में माथा टेका।
हरसिमरत कौर ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि एक अक्तूबर को किसानों के आंदोलन में बढ़कर हिस्सा लें। एक अक्तूबर को चंडीगढ़ का घेराव करेंगे और इसके बाद दिल्ली कूच करेंगे। केंद्र सरकार रेडियो पर बात करने के बजाय पटरी पर बैठे किसानों से बात करे और उनकी समस्या सुने। एक सवाल के जवाब में कहा कि किसान भाइयों का साथ देने के लिए उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दिया है।
इससे बड़ी कुर्बानी देने की जरूरत पड़ी तो वह भी देंगे। अकाली दल किसानों व मजदूरों की पार्टी है। हरसिमरत कौर ने कहा कि कांग्रेस और आप दोहरी नीति अपना रही है। कांग्रेस खुद कृषि विधेयक के हक में थी। जब मनमोहन सिंह की सरकार थी तब कई बार वह एमएसपी पर कानून बनाने की बात कर चुके हैं। एक सवाल के जवाब में हरसिमरत कौर ने कहा कि बादल परिवार पर जो आरोप लगे हैं, उसकी जांच ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) कर रही है, ईश्वर उनके साथ है, सब ठीक होगा।
'एक साल पहले ही दे दी थी कैप्टन ने खेती कानून को सहमति'
हरसिमरत कौर ने खेती कानून के मुद्दे पर राज्य के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह व वित्तमंत्री मनप्रीत सिंह बादल पर तीखे हमले किए। उन्होंने आरोप लगाया कि करीब एक साल पहले मुख्यमंत्रियों की बैठक के दौरान ही कैप्टन अमरिंदर सिंह ने खेती कानून के प्रति सहमति दे दी थी। इसके बाद वित्तमंत्री मनप्रीत सिंह बादल भी सहमति देकर आए थे।
उन्होंने कहा कि पार्टी प्रमुख सुखबीर सिंह बादल ने कई बार कैप्टन अमरिंदर सिंह को सलाह दी लेकिन प्रदेश के जिस मुखिया के पास चार साल से दफ्तर में आने का समय नहीं है, वह लोगों के हित के बारे में कैसे सोचेंगे। राज्य की कैप्टन सरकार को खेती कानून के बारे में जानकारी थी, उन्हें इसे रोकने के लिए कानूनी कदम उठाने चाहिए थे लेकिन उन्होंने काफी देर कर दी।
उन्होंने दावा किया कि अकाली दल के स्टैंड के बाद ही देश में किसानों के पक्ष में लहर बनी। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ कांग्रेस व आप नेता किसानों के हक में खड़े होने का ड्रामा कर रहे हैं, दूसरी तरफ लोकसभा व राज्यसभा में उनके सांसदों ने बिल के विरोध में मतदान ही नहीं किया।