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मोहाली: आईपीसी की धारा 302 में पूर्व डीजीपी सैनी को मिली अग्रिम जमानत खारिज

Fri, 10 Jul 2020 11:19 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोहाली (पंजाब)

सार

  • 29 साल पुराने पूर्व आईएएस के बेटे के अपहरण से जुड़े केस में जिला अदालत का फैसला 
  • पुलिस को दी हिदायत, 302 का केस दर्ज करने से 3 दिन पहले सुमेध सैनी को दे सूचना
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विस्तार
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पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी पर दर्ज 29 साल पुराने पूर्व आईएएस के बेटे बलवंत सिंह मुल्तानी के अपहरण के मामले में शुक्रवार को नया मोड़ आ गया। जिला अदालत ने सुमेध सिंह सैनी को आईपीसी की धारा 302 में दी गई अग्रिम जमानत को खारिज कर दिया। साथ ही पुलिस को हिदायत दी कि जब भी सुमेध सिंह सैनी के खिलाफ आईपीसी की धारा 302 के तहत केस दर्ज किया जाए, तो उन्हें तीन दिन पहले इसकी सूचना या नोटिस दिया जाए।

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कुछ महीने पहले पंजाब पुलिस ने बलवंत सिंह मुल्तानी के अपहरण केस में मटौर थाने में पूर्व डीजीपी सैनी के खिलाफ अपहरण समेत कई धाराओं में केस दर्ज किया था। सैनी को इस मामले में जिला अदालत से जमानत मिल गई थी और उन्होंने पुलिस की जांच ज्वाइन कर ली थी। इसी बीच सैनी को लगा कि पंजाब पुलिस उन पर हत्या का केस दर्ज कर सकती है। ऐसे में उन्होंने जिला अदालत में एक और याचिका लगाई थी कि उक्त केस में अगर धारा-302 जुड़े तो उन्हें अग्रिम जमानत दी जाए, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया। 

इसके साथ ही उन्हें हत्या के केस में जमानत मिल गई है। जबकि शिकायतकर्ता ने कहा कि सैनी को जमानत गलत दी गई है। जब उन पर धारा-302 लगी ही नहीं है तो ऐसे में जमानत कैसे दे दी गई। इस पर उन्होंने जिला सेशन जज की अदालत में अर्जी लगाई और साथ ही मांग की थी कि जिस अदालत में केस की सुनवाई चल रही है, उसे दूसरी अदालत में शिफ्ट किया जाए। 

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इसके साथ ही सैनी को धारा-302 के तहत दी गई जमानत रद्द की जाए। इसके बाद अदालत ने उक्त केस की सुनवाई दूसरी अदालत में शिफ्ट कर दी थी। वहीं, धारा-302 में दी गई जमानत की याचिका पर लंबी बहस चली। इसके बाद सभी तथ्यों की सुनवाई के बाद सैनी की दी गई जमानत याचिका रद्द कर दी गई।

यह है पूरा मामला
वर्ष-1991 में जब सुमेध सिंह सैनी चंडीगढ़ के एसएसपी थे तो उन पर एक आतंकी हमला हुआ था। जिसमें सैनी बच गए थे, लेकिन उनकी सुरक्षा में तैनात 4 जवानों की मौत हो गई थी। इस मामले को आतंकवादी गतिविधि से जोड़ा गया था और फिर आरोप लगा था कि चंडीगढ़ पुलिस ने सैनी के इशारे पर मोहाली से बलवंत सिंह मुल्तानी को बिना कोई वजह बताए घर से जबरन उठा लिया था। 

इसके बाद वह कभी घर नहीं लौटा। बलवंत सिंह मुल्तानी के भाई पलविंदर सिंह मुल्तानी और उनके परिवार ने इस मामले में काफी लंबी लड़ाई लड़ी। आखिरकार पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों पर एक प्राथमिक जांच की गई। इसके बाद सीबीआई ने 2 जुलाई, 2008 को मामला दर्ज किया था। इसमें शिकायतकर्ता ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। 

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को इस आधार पर रद्द कर दिया कि हाईकोर्ट बेंच के पास केस का निपटारा करने के लिए अधिकार क्षेत्र की कमी है। शिकायतकर्ता ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने परिवार को नए सिरे से कार्रवाई की आजादी दी थी। 2014 में पूर्व डीजीपी सैनी के साथी रहे एक पूर्व अधिकारी ने मैगजीन को इंटरव्यू दिया था। जिसमें उन्होंने बलवंत सिंह मुल्तानी का जिक्र किया था कि किस प्रकार उसे यातनाएं दी गई थीं। इसके आधार पर परिवार ने अपनी जंग तेज की और नतीजतन अब मटौर थाने में पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी के खिलाफ अपहरण का यह केस दर्ज हुआ है।
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