पंजाब में कई साल से प्रॉपर्टी टैक्स न चुकाने वाले पुलिस विभाग पर आखिरकार इस बार निकाय विभाग सख्त हो गया है। विभाग ने टैक्स वसूली के लिए जहां पुलिस विभाग से पत्राचार शुरू किया है वहीं, कोशिश की जा रही है इस मामले को विभाग के मंत्री के माध्यम से सरकार तक पहुंचाया जाए ताकि पिछला टैक्स भी आसानी से मिल पाए। साथ ही भविष्य में टैक्स के लिए किसी तरह की देरी न हो।
विभाग का मानना इस टैक्स का सीधा प्रयोग संबंधित नगर निगमों या काउंसिलों द्वारा अपने एरिया में विकास कार्य के लिए किया जाता है। स्थानीय निकाय विभाग की तरफ से साल 2014 में प्रॉपर्टी टैक्स वसूलने की प्रक्रिया शुरू की थी। नियमों के मुताबिक सभी सरकारी और निजी संपत्तियों के मालिकों से प्रॉपर्टी टैक्स की वसूली की जाती है। हालांकि निकाय विभाग के ध्यान में यह बात आई है कि पुलिस द्वारा कई साल से प्रॉपर्टी टैक्स का भुगतान नहीं किया जा रहा है। पंजाब के 23 जिलों में पंजाब पुलिस करीब 413 थाने-चौकियों के अलावा कई बड़ी इमारतें, ट्रेनिंग स्कूल, पुलिस लाइन व अन्य चीजें स्थापित हैं। पुलिस द्वारा किसी भी जिले में भुगतान नहीं किया है। निकाय विभाग के डिफाल्टरों की सूची में पुलिस शामिल है।
कुछ समय पहले कई जिलों में पुलिस की टीम ने नगर निगम व नगर परिषदों के अधीन आने वाली संपत्ति की पैमाइश भी करवाई थी। उस समय पुलिस ने दलील दी थी कि पुलिस के सालाना बजट में प्रॉपर्टी टैक्स का कोई प्रावधान नहीं है। हालांकि अभी इस साल का बजट भी आना है। ऐसे में निकाय विभाग की कोशिश है कि इस चीज को पुलिस के बजट में शामिल करवाया जाए। साथ ही पुलिस को बड़ी राहत दिलाई जा सके।
निकाय विभाग के डायरेक्टर उमा शंकर गुप्ता ने बताया कि पुलिस समेत सभी सरकारी विभागों को प्रॉपर्टी टैक्स चुकाने के लिए कहा है। सभी से भी अपील की है कि समय से प्रॉपर्टी टैक्स चुकाएं, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न उठानी पड़े।
नगर निगम हुए आत्मनिर्भर, विकास ने पकड़ी रफ्तार
जब से पंजाब में प्रॉपर्टी टैक्स की शुरुआत हुई है तबसे सभी नगर निगम और नगर काउंसिल आत्मनिर्भर हुए हैं। इतना ही नहीं इलाके में विकास कार्य भी रफ्तार पकड़ रहे हैं। बड़े शहरों में तो प्रॉपर्टी टैक्स निगमों के लिए वरदान बना है। बड़ी नगर निगमों को इससे अच्छी कमाई हो रही है।