पंजाब की निचली अदालतों में अंग्रेजी भाषा को अदालती भाषा के रूप में लागू किए जाने संबंधी आदेश के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार, मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, गृह मामले व न्याय विभाग और पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार को 9 अगस्त के लिए नोटिस जारी किया है।
हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार की ओर से 5 फरवरी, 1991 को पंजाब राज्य में निचली अदालतों, जिनमें सिविल कोर्ट और क्रिमिनल कोर्ट दोनों शामिल हैं, को पत्र जारी कर अंग्रेजी भाषा को अदालती भाषा के रूप में लागू करने को कहा था। एडवोकेट एचसी अरोड़ा और लुधियाना के (पूर्व जिला अटार्नी) मित्र सेन गोयल ने जनहित याचिका दायर कर रजिस्ट्रार से उक्त आदेश को रद्द करने की मांग की है।
याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट से यह अपील भी की है कि 5 नवंबर, 2008 को अधिसूचित किए गए पंजाब आफिशियल लेंगुएज (संशोधन) एक्ट 2008 के सेक्शन 3-ए के तहत यह अनिवार्य किया गया था कि उक्त नोटिफिकेशन की तिथि से छह माह पर ‘सभी सिविल कोर्ट और क्रिमिनल कोर्ट जो पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के अधीन आती हैं, सभी रेवेन्यू कोर्ट और रेंट ट्रिब्यूनल या कोई अन्य कोर्ट या ट्रिब्यूनल जिसका गठन राज्य सरकार द्वारा किया गया हो, ऐसी सभी अदालतों और ट्रिब्यूनलों में कामकाज पंजाबी में किया जाएगा।’
याचिका में कहा गया है कि आठ वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी उपरोक्त वैधानिक प्रावधानों को लागू नहीं किया जा सका है, क्योंकि हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार की ओर से 2008 के संशोधन के हिसाब से निजी अदालतों को नए दिशा-निर्देश जारी नहीं किए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने अपनी याचिका में सिविल प्रोसिजर कोड 1908 के सेक्शन 137 और क्रिमिनल प्रोसिजर कोड 1973 के सेक्शन 272 का हवाला देते हुए यह भी कहा है कि राज्य सरकार हाईकोर्ट की निजी अदालतों के लिए आधिकारिक भाषा का निर्धारण कर सकती है।
इसलिए राज्य सरकार की ओर से 5 नवंबर, 2008 को जारी नोटिफिकेशन निचली अदालतों को इस बात के लिए बाध्य करता है कि राज्य की निचली अदालतों में सारा काम केवल पंजाबी भाषा में ही किया जाए।
पंजाब की निचली अदालतों में अंग्रेजी भाषा को अदालती भाषा के रूप में लागू किए जाने संबंधी आदेश के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को 9 अगस्त के लिए नोटिस जारी किया है।