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पंजाब में क्यों न चली मोदी की लहर, 4 कारण

Sat, 24 May 2014 10:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब में भाजपा का प्रदर्शन 2007 के विधानसभा चुनाव के बाद से निरंतर गिरता जा रहा है। 2014 के लोकसभा चुनाव में तो हालत यह हो गई कि न केवल पार्टी के कद्दावर नेता अरुण जेटली को मोदी की लहर के बावजूद अमृतसर लोकसभा सीट से हार का सामना करना पड़ा, बल्कि पार्टी अपने कोटे की 23 में से 15 विधानसभा सीटों पर पिछड़ गई।
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2009 के आम चुनाव में भी भाजपा प्रदेश में अपने 19 विधायक होने के बावजूद 21 विधानसभा सीटों पर पिछड़ी थी। पार्टी में इस संबंध में चल रहे मंथन में यह बात मुख्य रूप से उभर कर सामने आ रही है कि प्रदेश इकाई का विभिन्न मसलों पर शिरोमणि अकाली दल (शिअद) पर दबाव न बना पाना ही इसकी मौजूदा हालत का अहम कारण है।

ऐसे मसले हैं, जिन पर अकाली-भाजपा में तनाव

शहरी क्षेत्रों में प्रॉपर्टी टेक्स, विकास फंडों की असमान रूप से बांट, लोगों पर बिजली बिलों का भारी-भरकम बोझ, रेत-बजरी की कमी, उद्योगों-व्यापारियों पर टैक्स आदि ऐसे मसले हैं, जिन पर अलग-अलग समय भाजपा व शिअद के बीच संबंधों में तनाव उभरता रहा है। कई बार भाजपा नेताओं ने मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल और उप मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल पर दबाव बनाने की कोशिश भी की, लेकिन बात बन नहीं पाई।

पिछली अकाली-भाजपा सरकार के दौरान दबाव नीति के तहत एक बार पार्टी के मंत्री अपने इस्तीफे लेकर मुख्यमंत्री बादल के पास गए, तो बादल ने उन्हें यह कह कर चुप होने पर मजबूर कर दिया कि पहले वह उनका इस्तीफा ले लें।

इसके बाद मसले बैठकर कर हल करने की बात हुई, लेकिन हालात में परिवर्तन नहीं हो सका। पिछली गठबंधन सरकार के कार्यकाल के दौरान पंजाब भाजपा के प्रभारी चाहे बलबीर पुंज रहे या यशवंत सिन्हा, दोनों के ही समय में शिअद और भाजपा के रिश्तों में समय-समय पर तल्खी जारी रही।

नए सिरे से नियुक्तियां, फायदा पार्टी को नहीं

शांता कुमार के प्रदेश भाजपा प्रभारी बनने के बाद 2011 में पार्टी के सभी मंत्रियों और मुख्य संसदीय सचिवों के इस्तीफे लेकर, नए सिरे से नियुक्तियां की गईं। पार्टी ने यह कदम कार्यकुशलता में बदलाव को ध्यान में रखकर लिया था, लेकिन इसका कुछ खास फायदा पार्टी को नहीं हो पाया।

2007 की 19 सीटों के मुकाबले 2012 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को केवल 12 सीटों पर ही विजय हासिल हो पाई। अकाली-भाजपा गठबंधन की सरकार तो फिर से बन गई, लेकिन प्रॉपर्टी टेक्स और रेत-बजरी की कमी के मुद्दों पर भाजपा का शहरी वोट बैंक धीरे-धीरे इससे दूर होता चला गया। इन मसलों पर प्रदेश भाजपा का रवैया शिअद की हां में हां मिलाने वाला रहा, जिसका खामियाजा इसे 15 सीटों पर पिछड़ने के रूप में भुगतना पड़ा। अब शांता कुमार कह रहे हैं कि पंजाब में पार्टी को कुछ मंत्रियों की छवि और गठबंधन सरकार की खराब कारगुजारी का नुकसान लोकसभा चुनाव में हुआ।
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चिंतन के लिए कोर ग्रुप की बैठक 27 को दिल्ली में

पंजाब भाजपा की कोर ग्रुप बैठक नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ लेने के एक दिन बाद 27 मई दिल्ली में होगी।

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष कमल शर्मा के अनुसार, दिल्ली स्थित पंजाब भवन में होने वाली इस बैठक में लोकसभा चुनाव नतीजों की समीक्षा की जाएगी। इस दौरान नतीजों पर चिंतन के साथ ही पंजाब सरकार की कारगुजारी की भी समीक्षा होगी। बैठक में पंजाब भाजपा प्रभारी शांता कुमार और सह-प्रभारी श्याम जाजू विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
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