पंजाब में हर चुनाव में मतदाता का मिजाज बदलता है। यहां सूबे की सत्ताधारी पार्टी को लोकसभा चुनाव का फायदा मिलता रहा है। 2019 में लोकसभा की आठ सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल कर पंजाब में नरेंद्र मोदी की लहर को रोक दिया था।
पंजाब के मतदाता हर लोकसभा चुनाव में अपने मिजाज बदलते रहते हैं। हर चुनाव में यहां की राजनीतिक तस्वीर बदल जाती है। सूबे में जो पार्टी सत्ता में होती है, उसको कुछ फायदा जरूर मिलता है, लेकिन पंजाब के मतदाता हर चुनाव में चौंकाने वाले फैसले लेते हैं। कांग्रेस ने 2019 में लोकसभा की आठ सीटों पर जीत हासिल कर पंजाब में नरेंद्र मोदी की लहर को रोक दिया था।
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इससे सभी राजनीतिक विश्लेषक हैरान रह गए थे। हालांकि, वर्ष 2022 तक आते-आते तस्वीर बदलने लगी, जो कांग्रेस सूबे में नंबर वन थी, आम आदमी पार्टी उससे काफी आगे निकल गई। आप ने पंजाब में 92 सीटों पर परचम लहराकर कांग्रेस का किला ध्वस्त किया। साथ में शिरोमणि अकाली दल को भी तीन सीटों पर सिमटने पर मजबूर कर दिया। भाजपा दो सीटों पर ही अटक गई।
2014 के लोकसभा चुनाव में पंजाब में शिरोमणि अकाली दल भाजपा की सरकार थी और आप को लोकसभा में चार सीटें मिली थीं। यह काफी चौंकाने वाला नतीजा था। पटियाला से धर्मवीर गांधी, संगरूर से भगवंत मान, फतेहगढ़ साहिब से हरिंदर सिंह खालसा व फरीदकोट से प्रो. साधू सिंह चुनाव जीते थे।
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आप को 24.40 फीसदी मत हासिल हुए थे। कांग्रेस को 33.10 फीसदी वोट, भाजपा को 8.70 फीसदी व अकाली दल को 26.30 फीसदी मत हासिल हुए थे। कांग्रेस 13 में से तीन सीटें ही जीत पाई थी, जबकि चार पर आप और बाकी छह पर भाजपा-शिअद गठबंधन के उम्मीदवार जीते थे। पंजाब में तब शिरोमणि अकाली दल व भाजपा की सरकार थी।
2019 में तस्वीर बिलकुल बदल गई। पंजाब में कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार 2017 में सत्तासीन हो चुकी थी। कांग्रेस का वोट प्रतिशत 33.10 फीसदी से बढ़कर 40 फीसदी तक पहुंच गया। कांग्रेस ने जहां 2014 में तीन सीट जीती थीं, वहीं 2019 में आठ सीटों पर परचम लहराया।
वहीं, आम आदमी पार्टी के चार सांसद थे, लेकिन भगवंत मान अकेले रह गए और वोट प्रतिशत गिरकर 7.38 फीसदी आ गया। 2014 में आप का वोट प्रतिशत 24.4 फीसदी था, जो 7.38 फीसदी आ गया। वहीं शिरोमणि अकाली दल का वोट प्रतिशत बढ़कर 27.45 फीसदी हो गया, जोकि 2014 में 26.3 फीसदी था। अकाली दल व भाजपा के दो-दो सांसद रह गए। भाजपा ने होशियारपुर व गुरदासपुर सीट जीतकर 9.63 फीसदी वोट हासिल किए।
अब पंजाब की राजनीतिक तस्वीर फिर बदल चुकी है। 2022 में आप ने पंजाब में प्रचंड जीत हासिल की है। आप ने 92 सीटें विधानसभा में जीती हैं और 2019 में जो वोट 7.38 फीसदी था। वह सीधा जंप कर 42.3 फीसदी तक जा पहुंच गया। कांग्रेस जो 40 फीसदी थी, वह 23.1 फीसदी पर आकर गिर गई। शिरोमणि अकाली दल जो 2019 में 27.45 पर था, वह 18.5 प्रतिशत पर आ गया।
उपचुनाव में भी चौंकाया
भगवंत मान के मुख्यमंत्री बनने के बाद संगरूर संसदीय सीट पर हुए उपचुनाव में भी पंजाब के मतदाताओं ने चौंकाने वाला काम किया। यहां आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगा। इस सीट पर आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार गुरमेल सिंह चुनाव हार गए। यहां से शिरोमणि अकाली दल (अमृतसर) के सिमरनजीत सिंह मान को चुनाव में जीत मिली। उन्होंने गुरमेल सिंह को 5822 मतों से हराया। संगरूर लोकसभा उपचुनाव के दौरान कम मतदान हुआ था। यहां केवल 45 फीसदी वोट पड़े थे, जो 2019 के चुनावों की तुलना में 27.1 प्रतिशत कम था।
संगरूर लोकसभा से चुनाव जीतने वाले सिमरनजीत सिंह मान आईपीएस अधिकारी भी रहे हैं। सिमरनजीत मान 1989 में तरनतारन से और 1999 में संगरूर सीट से लोकसभा के सदस्य रह चुके हैं। इसके बाद जालंधर उपचुनाव में कांग्रेस की जीत पक्की मानी जा रही थी, क्योंकि चौधरी संतोख सिंह के निधन के बाद खाली हुई सीट पर उनकी पत्नी कर्मजीत कौर चौधरी मैदान में थीं।
माना जा रहा था कि उन्हें राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा और सहानुभूति वोट मिलेगा, लनेकिन ऐसा नहीं हुआ। आप के उम्मीदवार सुशील रिंकू ने कांग्रेस की उम्मीदवार कर्मजीत कौर चौधरी को 58,691 वोटों से हरा दिया। कांग्रेस इससे पहले चार बार से यह सीट जीत रही थी। चौथे नंबर पर शिअद अमृतसर के गुरजंट सिंह को 20354 वोट मिले थे।
यह लोकतंत्र की खूबसूरती है
डीएवी यूनिवर्सिटी की पूर्व वाइस चांसलर प्रो. जसबीर कौर रिशी का कहना है कि यही तो लोकतंत्र की खूबसूरती है। वोट का स्विंग होना हमेशा बेहतरी के लिए गिना जाता है। इसका मतलब है कि पंजाब के लोग एक पार्टी पर विश्वास नहीं करते। अपना वोट मौके व उम्मीदवार व पार्टी को देखकर करते हैं।
पिछले तीन चुनाव की स्थिति
2019: केंद्र में भाजपा के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी
कुल मतदान- 65.94% (कांग्रेस 40.12% वोट- 8 सीटें, भाजपा: 9.63% वोट 2 सीटें, आप: 7.38% 1 सीट, शिअद: 27.76% वोट 2 सीटें)
2014: केंद्र में भाजपा के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनी
-कुल मतदान- 70.63% (शिअद: 26.30% 4 वोट 4 सीटें, आप: 24.4% वोट 4 सीटें, कांग्रेस: 33.10% वोट 3 सीटें, भाजपा 8.70% वोट 3 सीटें)
2009: कांग्रेस के नेतृत्व में यूपीए की सरकार बनी
-कुल मतदान- 69.78% (कांग्रेस: 34.17% वोट 2 सीटें, शिअद: 34.28% वोट 8 सीटें, भाजपा: 10.48% वोट 3 सीटें)