पंजाब की इस सीट पर सुखबीर बादल के सामने शिअद का गढ़ बचाने की कठिन चुनौती है। भाजपा-शिअद की दोस्ती टूटने का फायदा कांग्रेस को मिल सकता है। चतुष्कोणीय मुकाबले में बादल परिवार की प्रतिष्ठा दांव पर है।
भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को अपनी गोद में सुलाने वाली शहीदों की धरती फिरोजपुर में दो और नाम चर्चा में रहते हैं। एक पाकिस्तान से लगता हुसैनी वाला बॉर्डर, दूसरा प्रकाश सिंह बादल। पंजाब के पांच बार मुख्यमंत्री रहे बादल अब नहीं रहे, लेकिन नाम जिंदा है।
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बॉर्डर क्षेत्र की तमाम पेचीदगियों और परेशानियों की तरह उनकी पार्टी शिरोमणि अकाली दल भी तमाम दुश्वारियों से जूझ रही है। भाजपा के साथ गठबंधन में 26 साल से फिरोजपुर सीट पर एकछत्र राज करने वाली शिअद इस बार अकेले है। प्रकाश सिंह बादल के बेटे व मौजूदा सांसद सुखबीर सिंह बादल के सामने गढ़ बचाने की चुनौती है।
शिअद को सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी, पिछले चुनाव में आठ सीटें जीतने वाली कांग्रेस और पूर्व सहयोगी भाजपा से कड़ी टक्कर मिल रही है। सुखबीर खुद मैदान में नहीं हैं। उन्होंने यहां से तीन बार सांसद रहे जोरा सिंह मान के बेटे नरदेव सिंह मान को टिकट दिया है। उनके पास सिर्फ एक बार सरपंची का अनुभव है।
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आप के निशाने पर शिअद और कांग्रेस
आम आदमी पार्टी भाजपा को कमजोर मानकर शिअद और कांग्रेस को घेर रही है। सीएम भगवंत मान सांसद सुखबीर पर तंज कसते हैं कि वे न संसद जाते हैं, न ही पंजाब से जुड़े सवाल उठाते हैं। आप ने जगदीप काका बराड़ को उतारा है।
कांग्रेस के सामने दिक्कत है कि पार्टी के सभी बडे़ नेताओं को भाजपा ने अपने पाले में कर लिया है। कांग्रेस ने शिअद से आए शेर सिंह घुबाया को टिकट दिया है। घुबाया 2014 में शिअद से सांसद बने थे। 2019 में सुखबीर ने टिकट काट दिया तो कांग्रेस में शामिल होकर उनके खिलाफ लड़े और पराजित हुए।
पिता-पुत्र आमने-सामने
यहां बसपा ने अलग ही खेल किया है। जलालाबाद से आप के विधायक जगदीप सिंह के पिता सुरिंदर कंबोज को टिकट दिया है। हालांकि, यहां बसपा का जनाधार नहीं है। अब आप विधायक को अपने पिता के खिलाफ ही चुनाव प्रचार करना पड़ रहा है।
उलझन में मतदाता
चतुष्कोणीय मुकाबला होने से फिरोजपुर के मतदाता उलझन में हैं। सदर बाजार में दोपहर दो बजे तेज धूप के बावजूद दुकानों की शेड के नीचे कुछ व्यापारी खड़े मिले। मुकेश बोले-कांग्रेस की वापसी होती दिख रही है। सुभाष टोकते हुए बोले, कांग्रेस का भी राज देख लिया। किसी ने फिरोजपुर के लिए नहीं सोचा। आम आदमी पार्टी को आजमाया तो कानून-व्यवस्था बिगड़ गई। सरेआम लूट और छिनैती होने लगी है।
पास खड़े सुरेंद्र कुमार बोले-वोट देने लायक तो कोई नहीं। शिअद को अब तक जिताते आ रहे। भाजपा वाले भी उनके साथ थे। कोई फायदा तो दिखा नहीं। व्यापारी नवनीत सेठी ने कहा, लंबे अरसे से राज्य में डबल इंजन की सरकार नहीं है। पंजाब इसका नुकसान उठा रहा है। इस बार ज्यादातर शहरी वोटर भाजपा के साथ है। गांवों का वोट आप और शिअद में बंटेगा। कांग्रेस का सफाया हो जाना है।
कैप्टन की रणनीति...शूटर पर दांव
भाजपा का फिरोजपुर में यह पहला चुनाव है। इसके रणनीतिकारों ने सभी उम्मीदवारों की ताकत का अंदाजा लगाने के बाद सबसे अंत में अपना प्रत्याशी उतारा।
इस गुणा-भाग में भाजपा ने खांटी कांग्रेसी से भाजपाई बने पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की रणनीति पर भरोसा किया। उनकी सिफारिश पर पूर्व अंतरराष्ट्रीय शूटर राणा गुरमीत सिंह सोढ़ी को मैदान में उतारा है। चार बार के विधायक सोढ़ी कैप्टन सरकार में खेल व युवा मामलों के मंत्री रह चुके हैं। उन्होंने कांग्रेस और शिअद दोनों की चिंता बढ़ा दी है।
फिरोजपुर में ही रोका गया था पीएम मोदी का काफिला
फिरोजपुर में पांच फरवरी, 2022 का घटनाक्रम भुलाया नहीं जा सकता। इस दिन पीएम नरेंद्र मोदी फिरोजपुर में रैली करने जा रहे थे। हुसैनीवाला में राष्ट्रीय शहीद स्मारक से करीब 30 किमी दूर एक फ्लाईओवर पर कुछ प्रदर्शनकारियों ने उनका काफिला रोक लिया था। पीएम आगे नहीं जा सके। रैली रद्द करनी पड़ी।
किसान आंदोलन के नाम पर भाजपा का विरोध अब भी जारी है। इससे निपटने की तैयारी भाजपा ने 2022 में उसी घटना के बाद से शुरू कर दी थी। स्वयंसेवकों की बड़ी फौज खामोशी से किसानों और केंद्रीय योजनाओं के लाभार्थियों को साधने में जुटी है। पार्टी विरोध के अंधड़ में जीत की लौ जलाने की कोशिश कर रही है।