वरिष्ठ एडवोकेट व संवैधानिक मामलों के जानकार हेमंत कुमार ने बताया कि लोकसभा चुनाव के साथ करनाल उपचुनाव के लिए वोट डाले गए हैं। यहां से नायब सिंह सैनी चुनाव मैदान में हैं। यदि वह जीतते हैं तो विधानसभा में भाजपा के विधायकों की संख्या 41 हो जाएगी। इसके बावजूद भाजपा बहुमत से एक संख्या दूर रहेगी। वहीं, मौजूदा विधानसभा के पांच विधायक कांग्रेस से वरुण मुलाना और राव दान सिंह, भाजपा से मोहनलाल बडोली, इनेलो से अभय चौटाला और जजपा से नैना सिंह चौटाला भी लोकसभा सांसद का चुनाव लड़ रहे हैं। यदि इनमें से एक या दो या अधिक जीतकर सांसद बनते हैं तो उन्हें निर्धारित समय में विधायक का पद छोड़ना होगा जिसके बाद विधानसभा के वर्तमान अंकगणित में और बदलाव हो सकता है एवं इस कारण तब तक राजनीतिक संशय बना रहेगा।
जब तीन निर्दलीय विधायकों ने सरकार से समर्थन वापस ले लिया था, तो उस दौरान राकेश दौलताबाद की भी चर्चा थी कि वह सरकार से समर्थन वापस ले रहे हैं। मगर बाद में उन्होंने एक वीडियो जारी भाजपा की सैनी सरकार में निष्ठा जताई थी। उन्होंने भाजपा को बिना शर्त समर्थन जारी रखा था।
इन सारी परिस्थितियों में भाजपा को जजपा के बागी विधायकों से ही उम्मीद है। पिछले दिनों जजपा के तीन विधायकों के साथ भाजपा के पूर्व सीएम मनोहर लाल के साथ एक गुप्त बैठक भी हुई थी। उस दौरान जजपा के बागी विधायक देवेंद्र बबली व दो अन्य विधायक थे। मगर लोकसभा चुनाव के दौरान बबली ने कांग्रेस को समर्थन देकर नई परेशानी खड़ी कर दी है, मगर जजपा के एक अन्य विधायक रामकुमार गौतम ने लोकसभा चुनाव में भाजपा को समर्थन देकर उम्मीदें बनाए रखी हैं।
निर्दलीय विधायक राकेश दौलताबाद के निधन के बाद वर्तमान हरियाणा विधानसभा की सदस्य संख्या 88 से 87 हो गई है, जिससे सदन में बहुमत का आंकड़ा 45 से घटकर 44 हो गया है। अब सरकार के पास कुल 42 विधायकों का ही समर्थन बचा है। ऊपरी तौर पर तो लगता है कि सरकार अल्पमत में है। मगर यह साबित सदन में मतदान के दौरान साबित हो सकेगा। -हेमंत कुमार, एडवोकेट व विधायी एवं संवैधानिक मामलों के जानकार।