‘वो छत पर चढ़ा पतंग उड़ाने के बहाने, पड़ोसन भी आ गई कपड़े सुखाने के बहाने, जब बीबी ने देखा यह हसीन नजारा, वो डंडा ले आई बंदर भगाने के बहाने।’ ये पंक्तियां दिल्ली से आए हास्य कलाकार महेंद्र शर्मा ने अपनी हास्य कविता ‘वो डंडा ले आई बंदर भगाने के बहाने’ में सुनाई। मौका था, पंजाब कला भवन में चंडीगढ़ सहित्य अकादमी की ओर से शनिवार को आयोजित हास्य कवि सम्मेलन का।
यूटी एडमिनिस्ट्रेशन के डिपार्टमेंट ऑफ कल्चरल अफेयर्स की ओर से आठवें आर्ट एंड हेरिटेज फेस्टिवल के दौरान शनिवार को पंजाब कला भवन में हास्य कवि सम्मेलन, सेक्टर-17 प्लाजा में विभिन्न कलाकाराें की ओर से लोक नृत्य और टैगोर थिएटर में कॉमेडी प्ले ‘ताक झांक’ का आयोजन किया गया। हास्य कवि सम्मेलन में देश के जाने माने कवियाें ने शिरकत की।
इनमें हरि सिंह दिलबर (सिरसा) से, महेंद्र शर्मा (दिल्ली), योगेंद्र मोदगिल (पानीपत), मास्टर महेंद्र (हरियाणा), सूफी जगजीत (अंबाला), सत्यदेव हरियाणवी (दिल्ली), जीएन राज (पंचकूला), सतीश पॉपुलर (चंडीगढ़) ने अपनी हास्य कविताआें से कला भवन मे उपस्थित लोगाें का हंसंने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम में मुख्य मेहमान केरुप में गृह सचिव अनुराग अग्रवाल ने शिरकत की। इनकी हास्यास्पद कविताओं ने श्रोताओं को हंसने पर मजबूर कर दिया।
कार्यक्रम में चंडीगढ़ के हास्य कवि सतीश पॉपुलर ने अपनी रचना ‘टेंशन बढ़ती ही जा रही है’ ‘एक दिन मैं मंडी गया, वहां केले वाले से पूछा कैसे दिए, तो उसने कहा 50 रुपये दर्जन, तो मैंने कहा कुछ कम कर दो, तो केले वाले ने झट से उसमें से दो केले कम कर दिए...’ सुनाकर वाहवाही लूटी तो दिल्ली के सत्यदेव हरियाणवी की व्यंग्यात्मक कविता... ‘कुवांरी बेटी के बाप ने रो-रो कर प्रशासन से प्रार्थना की समाज से दहेज का कंलक मिटना चाहिए। कन्या के लिए वर मिलना चाहिए उचित मूल्य की दुकान पर...’ सुनकर श्रोता अपी हंसी नहीं रोक पाए।
वहीं हरियाणा के मास्टर महेंद्र ने कविता ‘चल कल फिर ट्राई मारने आएंगे’ में.... ‘जब उनकी गली से निकला मेरा जनजा वह अपने घर में करते रहे मुजरा। चार अश्क भी बहाने नहीं आए, आखिरी सलाम का हाथ हिलाने भी नहीं आए। इस बात से मुझे ऐसा दुख लगा कि तुरंत खड़ा हो गया जनाजे वालों से गुस्से में कहा चलो यहां कल भी आएंगे ट्राई मारने...’ सुनाकर खूब तालियां बटोरीं।