जेल मंत्री ने बताया कि पहले से पैरोल पर गए कैदियों एकांतवास को ध्यान में रखते हुए उनके पैरोल की अवधि और 6 माह के लिए बढ़ा दी जाएगी। ऐसे हवालाती कैदियों को 6 महीने की अंतरिम जमानत पर छोड़ने का फैसला लिया गया है, जो एक या दो केसों का सामना कर रहे हैं और उनमें उन्हें अधिकतम 7 साल की सजा हो सकती हो। इनके अलावा आईपीसी की धारा 498 ए, 420 , 406, 324, 325 , 389, आबकारी एक्ट और सीआरपीसी की धारा 107 /151 के तहत विशेष केसों के तहत जमानत पर विचार किया जाएगा। अंतरिम जमानत की मंजूरी के लिए कैंप अदालतें जेलों के अंदर ही लगाई जाएंगी।
यह कैदी नहीं छोड़े जाएंगे
जेल मंत्री ने स्पष्ट किया कि पोक्सो एक्ट, आईपीसी की धारा 376, 389 बी, तेजाब हमले, यूएनपीए, विस्फोटक एक्ट और विदेशी नागरिकता के तहत सजा का सामना कर रहे कैदियों को रिहा नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि एनडीपीएस एक्ट के अधीन आने वाले केसों संबंधी कैदियों को भी रिहा नहीं किया जाएगा। हालांकि एचआईवी , शुगर की बीमारियों से पीड़ित कैदियों, गर्भवती औरतों और 65 साल की उम्र से अधिक वाले कैदियों को शर्तों में छूट दी जाएगी।