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Punjab: भाजपा में शामिल IAS परमपाल कौर ने इस्तीफा नहीं दिया, VRS की प्रक्रिया अपनाई, सीएम बोले-जांच की जाएगी

Fri, 12 Apr 2024 10:49 AM IST
निवेदिता वर्मा भारत भूषण मित्तल, संवाद, बठिंडा (पंजाब)

सार

शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता सिकंदर सिंह मलूका का बेटा गुरप्रीत सिंह मलूका और बहू आईएएस परमपाल कौर मलूका वीरवार को दिल्ली में भाजपा में शामिल हुए थे। परमपाल कौर ने इससे पहले इस्तीफा दे दिया था। उनके भाजपा में शामिल होने के बाद सीएम भगवंत मान ने पोस्ट किया था कि अभी तक उनका इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ है।
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भाजपा में शामिल हुईं आईएएस परमपाल कौर मलूका - फोटो : फाइल
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विस्तार
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भाजपा में शामिल हुईं पंजाब की आईएएस महिला अधिकारी परमपाल कौर के इस्तीफे पर विवाद छिड़ गया है। परमपाल कौर गुरुवार को अपने पति गुरप्रीत सिंह मलूका के साथ भाजपा में शामिल हुई थीं। वे शिअद के वरिष्ठ नेता सिकंदर सिंह मलूका की बहू हैं। 
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भाजपा में शामिल होने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने ट्वीट कर स्पष्ट किया था कि अभी तक परमपाल कौर मलूका का इस्तीफा मंजूर नहीं हुआ है। वहीं सूत्रों के हवाले से सामने आया है कि परमपाल ने अपनी नौकरी से इस्तीफा नहीं दिया बल्कि वालंटियर रिटायरमेंट की प्रक्रिया को अपनाया है। 

सूत्रों के अनुसार, आईएएस परमपाल कौर मलूका ने स्व इच्छुक सेवामुक्ति के लिए वालंटियर रिटायरमेंट प्रक्रिया को अपनाया था। मुख्यमंत्री मान के पास फाइल अप्रूवल के लिए भेजी गई थी। सूत्रों ने बताया कि परमपाल कौर ने वीआरएस की प्रक्रिया इसलिए अपनाई थी ताकि उनको नौकरी छोड़ने के बाद वे सभी लाभ मिल सकें, जो किसी भी आईएएस अधिकारी को उसका कार्यकाल समय पूरा होने के बाद असलियत में रिटायरमेंट होने पर मिलते हैं। सूत्रों ने बताया कि वालंटियर रिटायरमेंट के लिए नोटिस का प्रावधान होता है। इसके चलते आईएएस मलूका की इस प्रक्रिया को इस्तीफा नहीं कहा जा सकता।
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आईएएस परमपाल कौर के इस्तीफे की होगी जांच - मान
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने आईएएस परमपाल कौर के इस्तीफे पर कहा कि आईएएस परमपाल कौर का इस्तीफा अभी मंजूर नहीं हुआ है। पहले उन्हें आईएएस बनने की जल्दबाजी थी, अब अब उन्हें राजनीति में आने की इतनी जल्दी है कि उनका अभी तक इस्तीफा स्वीकार भी नहीं हुआ है, लेकिन वह चुनाव लड़ने को बेचैन है। 

मान ने कहा कि यह मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार और कुछ कानूनी कर्तव्य भी है है कि कब और कैसे इस्तीफा स्वीकार करना है। इसके लिए कुछ नियम कायदे है जिसका हमें हर हाल में अनुपालन करना पड़ता है। किसी भी अफसर का इस्तीफा देते ही स्वीकार नहीं होता। उसमें कुछ समय लगता है। सरकार द्वारा परमपाल कौर सिद्धू के इस्तीफा देने के पीछे के कारणों का पता लगाया जा रहा है। अगर जांच में उनका मकसद और उद्देश्य गलत पाए गए तो उन पर कार्रवाई भी की जाएगी। मान ने कहा कि परमपाल कौर सिद्धू को जल्दी जल्दी में राजनीतिक सिफारिश के तहत अफसर बनाया गया। उनके ससुर और शिरोमणि अकाली दल के नेता सिकंदर सिंह मालूका ने कैसे जल्दी में उनको अफसर बनवाया था। यह बात पूरे पंजाब को पता है।
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