निजी कंपनियों की मनमानी पर सरकार सख्त हो गई है। चंडीगढ़, पंजाब और हिमाचल प्रदेश की 5222 कंपनियों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है, अब हरियाणा की बारी है। केंद्र सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ कारपोरेट अफेयर्स के अधीनस्थ दि रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज के चंडीगढ़ स्थित क्षेत्रीय कार्यालय ने कंपनियों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया। इनमें 773 हिमाचल, 4449 कंपनियां चंडीगढ़ और पंजाब की शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि इन तीनों राज्यों में कंपनियों की संख्या 38000 के करीब है। उधर, हरियाणा में अभी कंपनियों की स्थिति को खंगाला जा रहा है। जिसके बाद वहां मनमर्जी करने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उधर, विभाग ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को भी लिख दिया है कि उक्त सभी कंपनियों (जिनकी रजिस्ट्रेशन रद्द कर दी गई हैं) के बैंक खातों को भी तुरंत प्रभाव से सील कर दिया जाए। विभाग के रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज डॉ. राज सिंह ने इसकी पुष्टि की है।
इसलिए गिरी कंपनियों पर गाज
दि रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज कार्यालय ने यह एक्शन उक्त कंपनियों को बार-बार नोटिस देने के बाद उठाया है। दरअसल, इन कंपनियों को हर साल नियमानुसार अपनी सालाना बैलेंस शीट, एनुअल रिटर्न और अन्य दस्तावेजों (जो ये दर्शाए कि संबंधित कंपनी सरकार के नियमानुसार वजूद में हैं) को विभाग की वेबसाइट पर अपलोड करनी अनिवार्य है, लेकिन इन कंपनियों ने हिदायतों के बावजूद ऐसा नहीं किया, जिसके बाद विभाग को उनके खिलाफ कड़ा निर्णय लेना पड़ा। सूत्रों के अनुसार कई कंपनियां तो सिर्फ गुमराह करने के लिए सिर्फ फर्जी कागजों में ही खोली गई थी। विभाग लगातार इन कंपनियों की मॉनीटरिंग कर रहा था।
कंपनियों के निदेशक अयोग्य घोषित
कंपनियों की रजिस्ट्रेशन रद्द करने के अलावा इन कंपनियों के निदेशकों को भी विभाग ने अयोग्य घोषित कर दिया है। कंपनियों के इन निदेशकों को जारी ‘डिन’ (डीआईएन, डायरेक्टर आइडेंटिफिकेशन नंबर) को भी डी-एक्टिवेट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। ‘डिन’ निष्क्रिय होने के बाद ये डायरेक्टर अब किसी अन्य कंपनियों में कभी डायरेक्टर नहीं कर पाएंगे।