दो डोनरों के अंगदान से पांच को नया जीवन और चार रोशनी मिली है। पीजीआई ने डोनरों से मिले अंग को सफलतापूर्वक पांच मरीजों में ट्रांसप्लांट किया। कोर्निया को सुरक्षित रख लिया गया है। मैचिंग मरीज मिलते ही चारों कोर्निया जरूरतमंद मरीज में ट्रांसप्लांट कर दी जाएंगी। पीजीआई के मुताबिक 13 नवंबर को हरियाणा का 25 वर्षीय युवक बाइक से जा रहा था, तभी एक तेज रफ्तार कार चालक ने टक्कर मार दी। इससे युवक गंभीर रूप से घायल हुआ। युवक को जीएमसीएच 32 में एडमिट कराया गया। वहां से पीजीआई रेफर कर दिया गया।
डाक्टरों ने पूरी कोशिश की, मगर उसकी हालत में सुधार नहीं आया। ट्रांसप्लांट को-आर्डिनेटर ने युवक के परिजनों से अंगदान की बात की तो वे तैयार हो गए। युवक की किडनी, लिवर पेनक्रियाज और दोनों कोर्निया सुरक्षित निकाले गए और सभी महत्वपूर्ण अंग जरूरतमंद मरीजों में ट्रांसप्लांट कर दिए गए। युवक के पिता ने कहा कि अंगदान के पीछे मेरा मकसद बेटे की यादों को जिंदा रखना है। कुछ ऐसा ही पंजाब पुलिस से रिटायर्ड 62 वर्षीय व्यक्ति के साथ हुआ। वे जब फगवाड़ा की सड़कों में घूम रहे थे, तभी एक अज्ञात वाहन ने उन्हें टक्कर मार दी। इससे वे बुरी तरह से घायल हो गए।
उन्हें जालंधर के हास्पिटल में एडमिट कराया गया, लेकिन कोई सुधार नहीं आने पर उन्हें पीजीआई रेफर कर दिया गया। पीजीआई में भी उनकी हालत जस की तस बन रही। बाद में डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेड घोषित कर दिया। उनकी दोनों किडनी और दोनों कोर्निया को सुरक्षित निकाल लिया गया है। किडनी तुरंत जरूरतमंद मरीजों में ट्रांसप्लांट कर दी गई, जबकि कोर्निया को सुरक्षित रखा गया है। रोटो पीजीआई के नोडल आफिसर प्रो. विपिन कौशल ने बताया कि जब किसी का कोई प्यारा चला जाता तो पूरा परिवार टूट जाता है। ऐसे वक्त में इस तरह के फैसला लेना आसान नहीं होता। मगर पंजाब व हरियाणा के दोनों परिवारों ने मिथ्यों को दरकिनार कर आर्गन डोनेशन में एक नई मिसाल पेश की है।