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पाकिस्तानी जेलों में कैद भारतीयों को लेकर हाईकोर्ट ने की सख्त टिप्पणी, पढ़ें

Thu, 02 Nov 2017 09:06 AM IST
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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कोर्ट - फोटो : सांकेतिक चित्र
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पाकिस्तान की जेल में बंद नानक सहित अन्य भारतीयों को वापस लाने को लेकर दिए गए केंद्र सरकार के जवाब पर हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की। पुरजोर तरीके से प्रयास कर रही है। ये लोग गलती से बार्डर पार कर पाकिस्तान में घुस गए थे। यह जानकारी केंद्र सरकार की ओर से पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान दी गई। केंद्र के प्रयास को याची द्वारा नाकाफी करार देने पर हाईकोर्ट ने कहा कि जब विदेशमंत्री खुद इस तरह के मामलों में दिलचस्पी ले रही हैं, तो भी याची संतुष्ट नहीं है।
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कोर्ट ने कहा कि अब याची क्या चाहता है कि हम पाकिस्तान सरकार को अवमानना के तहत कोर्ट में खड़ा करें या जेम्स बांड की सर्विस ली जाए जो सबूत जुटा कर लाए। याची ने कहा कि उसे बहस के लिए कुछ समय दिया जाए। इस पर हाईकोर्ट ने सुनवाई टाल दी। लाहौर की कोट लखपत जेल में नानक सिंह के होने की बात कहते हुए उसे वापस लाने के लिए याचिका दाखिल की गई है।

केंद्र सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऑफ़ इंडिया सत्यपाल जैन ने हाईकोर्ट को बताया कि नानक सिंह के लाहौर की कोट लखपत जेल में होने से पाकिस्तान इंकार कर चुका है और पाकिस्तान यह मानने को तैयार नहीं है कि इस नाम का कोई व्यक्ति जेल में है।  बावजूद इसके पाकिस्तान में भारतीय दूतावास द्वारा मंत्रालय को इस बारे में पत्र लिखा गया है।
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इस मामले में डिप्लोमेट स्तर पर वार्ता लगातार जारी है और खास तौर पर तब जब विदेशमंत्री इस तरह के मामलों में दिलचस्पी ले रही हैं तो इस याचिका को लंबे समय तक चलाने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारे पास ऐसे कोई सबूत नहीं है जिससे यह दावा किया जा सके कि नानक जेल में मौजूद है। दूतावास ने जो पत्र लिखा है उसमें केवल कोटाला जेल ही नहीं बल्कि पाकिस्तान की सभी जेलों में नानक के होने की संभावना तलाशने की मांग की गई है।
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पाक जेल से लौटे कैदी ने दी जानकारी

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सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता स्वर्ण सिंह के वकील ने हाई कोर्ट को बताया कि  सोहल गांव का रहने वाला दिलबाग सिंह बिट्टू जिसे वाघा बॉर्डर के पास पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने एक ट्रक के जरिये पाकिस्तान में कुछ सामान भेजे जाने के समय गिरफ्तार कर लिया था,  उस पर फर्जी केस बनाकर 16 महीने की सजा सुनाई गई थी। इस दौरान वह कोट लखपत जेल में रहा था। 

इसी ने बताया है की वहां 25 भारतीय कैदी बंद हैं जिनमें नानक सिंह भी है। इस पर केंद्र ने कहा कि किसी के बयान को भगवान की वाणी तो नहीं माना जा सकता। यदि पाकिस्तान इनकार कर रहा है तो उस पर दबाव बनाने का प्रयास ही किया जा सकता है। इसके लिए उसे अवमानना का दोषी करार दे दिया जाए याची यह चाहता है क्या जो हमारे अधिकार क्षेत्र के बाहर है।

बिना सबूत नहीं जा सकते इंटरनेशनल कोर्ट
एडिशनल सॉलिसिटर जनरल सत्यपाल जैन ने कहा कि जब तक कोई पुख्ता सबूत नहीं है तब तक इंटरनेशनल कोर्ट में भी नहीं जाया जा सकता। ऐसा किया गया और केस हार गए तो देश की छवि खराब होगी। हाईकोर्ट ने याची को कहा कि अब फिलहाल केस का निपटारा करना ही सही होगा। इस पर याची ने आपत्ति जताई तो हाईकोर्ट ने कहा कि क्या चाहते हो कहो तो जेम्स बांड की सर्विस ले ली जाए। याची ने कहा कि उसे कुछ समय दिया जाए। हाईकोर्ट ने इसपर सुनवाई को टाल दिया।

यह है मामला
फाजिल्का के स्वर्ण सिंह नामक एक व्यक्ति ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर बताया है की, अजनाला का एक गांव जोकि पाकिस्तान की सीमा से बिलकुल सटा हुआ है के एक बेहद ही गरीब परिवार का 5 वर्षीय बेटा नानक वर्ष 1984 में एक दिन पशुओं को चराते हुए गलती से पाकिस्तान चला गया था। मामला बीएसएफ समेत हर स्तर पर उठाया गया पर कोई फायदा नहीं हुआ। स्वर्ण सिंह का कहना है की अब वह पांच वर्षीय बच्चा 37 वर्ष का हो गया होगा और वो अब भी बिना किसी जुर्म के पाकिस्तान की जेल हैं।
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