शहीद भगत सिंह नगर (नवांशहर) में अवैध खनन के मामले में वाहन मालिकों और ड्राइवरों की अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने खारिज कर दी। उच्च न्यायालय ने कहा कि हर मामले में अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जा सकता। मानवीय हस्तक्षेप के कारण प्राकृतिक आपदाएं अब मानव जीवन के लिए खतरा बनने लगी हैं।
इस वर्ष मई माह में राहों पुलिस थाने में अवैध खनन को लेकर एफआईआर दर्ज की गई थी और 22 टिप्पर व अन्य वाहन भी जप्त किए गए थे। वाहन मालिकों और ड्राइवरों की ओर से कहा गया कि उन्हें इस मामले में फंसाया जा रहा है। उनका खनन से कोई लेना देना नहीं है। इसके विरोध में पंजाब सरकार ने कहा कि अवैध खनन के मामले में इस्तेमाल होने वाले वाहनों के मालिक और ड्राइवर दोनों के खिलाफ मामला दर्ज करने का प्रावधान है।
इसके साथ ही बताया गया कि अप्रैल से लेकर अभी तक अवैध खनन के 200 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें लगभग 300 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उच्च न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद कहा कि अग्रिम जमानत का लाभ किसी को अनावश्यक असुविधा से बचाना है। ऐसे मामले में अग्रिम जमानत का लाभ नहीं दिया जाना चाहिए। न्यायालय ने 33 आरोपियों को दी गई अंतरिम जमानत के आदेश वापस लेते हुए उनकी अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया।
पंजाब सरकार कार्रवाई रिपोर्ट तीन माह में सौंपे
इस दौरान न्यायालय ने पंजाब सरकार द्वारा अवैध खनन को रोकने के लिए जारी किए गए दिशा-निर्देशों पर अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट 3 माह के भीतर न्यायालय में सौंपने के आदेश दिए हैं। इस दौरान न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए कहा कि प्राकृतिक संसाधन व मानव आपदाएं कुछ वर्ष पहले तक गैर वैज्ञानिक मानी जाती थीं। अब मानवीय हस्तक्षेप के कारण यह मानव जीवन के लिए खतरा बन गई हैं। प्राकृतिक संतुलन को देखते हुए यदि कदम नहीं उठाए गए तो मानव जीवन का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा।