Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
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कर्मचारी को मौका दिए बगैर उसके बारे में जारी किसी आदेश में प्रतिकूल टिप्पणी करना उसे कलंकित करने वाला हो सकता है, तबादला प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा होता है और ऐसे में इस प्रकार की टिप्पणियां गैर जरूरी हैं। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने लुधियाना में एएसआई समेत सात पुलिसकर्मियों के नशा तस्कर व अवैध खनन के आरोपियों से संबंध बताते हुए जारी तबादले के आदेश की निंदा करते हुए यह टिप्पणी की है।
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याचिका दाखिल करते हुए एएसआई सुखविंदर सिंह ने हाईकोर्ट को बताया कि आईजी लुधियाना रेंज ने 10 अगस्त को याचिकाकर्ता समेत 10 पुलिसकर्मियों का तबादला आदेश जारी किया था। तबादला आदेश की पहली लाइन में लिखा गया कि याचिकाकर्ता व अन्य पुलिसकर्मियों के नशा तस्करी और अवैध खनन के आरोपियों से संबंध पाए गए हैं। याची ने कहा कि उन्हें बिना कोई कारण बताओ नोटिस जारी किए तबादला आदेश में इस प्रकार की टिप्पणी करना गैर कानूनी है और इसे खारिज किया जाना चाहिए। इन टिप्पणियों से यह आदेश दंडात्मक हो गया है।
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हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलीलें सुनने के बाद कहा कि सरकार के पास अधिकार है कि वह कर्मचारी का तबादला कर सकती है लेकिन ऐसा करते हुए कर्मचारी के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणी करना गैर जरूरी है। कर्मचारी को उसका पक्ष रखने का मौका दिए बगैर आदेश में इस प्रकार की टिप्पणी को दर्ज करना उसे कलंकित कर सकता है। ऐसे में हाईकोर्ट ने अब इस याचिका को मांगपत्र समझते हुए लुधियाना के आईजी को इस पर फैसला लेने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने आदेश की प्रति आईजी को भेजने का भी आदेश दिया है ताकि कोर्ट के इस रुख के बारे में उन्हें बताया जा सके। साथ ही कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि कर्मचारी के नशीली सामग्री और अवैध खनन में लिप्त आरोपियों के साथ संबंध होने के संबंध में उपरोक्त टिप्पणी को कर्मचारी के खिलाफ किसी भी तरह से प्रतिकूल या कलंकपूर्ण न माना जाए।