किसानों की बदहाल स्थिति और आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं के मामले को लेकर दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को फटकार लगाई। पूछा है कि देश का पेट भरने वाला किसान आत्महत्या को मजबूर क्यों हो रहा है। हाईकोर्ट ने कहा कि खेती के नाम पर लोन लेकर किसान बच्चों की शादी करवाता है, इसके बाद कर्ज न चुका पाने के चलते आत्महत्या को मजबूर होता है। सरकार ने इस बारे में क्यों आंख मूंदी है। क्यों नहीं खर्च और मेहमानों की संख्या को सीमित किया जाता है।
पंजाब सरकार को 30 अक्तूबर तक इस बारे में जवाब दाखिल करना होगा। याची ने हाईकोर्ट को बताया कि साल 2015 में भी राज्य में किसानों की आत्महत्या की घटनाएं हुईं। इसे लेकर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याची मलकीत सिंह की ओर से कहा गया था कि पंजाब यूनिवर्सिटी, पंजाबी यूनिवर्सिटी, पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी व अन्य संस्थानों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पंजाब में साल 2000 से लेकर अब तक 10 हजार से ज्यादा किसान और खेत मजदूर आत्महत्या कर चुके हैं।
ऐसे में मामले में यह देखा जाना चाहिए कि ऐसे कौन से कारक हैं, जिसके चलते किसानों और खेत मजदूरों को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। जुलाई 2015 में हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए पंजाब सरकार को मामले को गंभीरता से लेते हुए इसके हल के लिए ठोस निति बनाने के आदेश दिए थे। अब दोबारा दायर अर्जी में कहा गया है कि कोर्ट के आदेशों के बावजूद सरकार ने अब तक इस दिशा में कोई ठोस नीति ही नहीं बनाई। जबकि इसके लिए उन्होंने सरकार को मांगपत्र भी सौंपा था।
लेक्चर दिए जा रहे हैं, लेकिन मसले पर ढंग की स्टडी तक नहीं हुई
याचिका पर हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए कहा कि किसानों की आत्महत्या के मसले को लेकर हर कोई चिंतित है। रोज अखबारों और मीडिया में इसकी खबरें आ रही हैं। लेक्चर दिए जा रहे हैं, लेकिन इस समस्या को लेकर एक भी ढंग की स्टडी तक नहीं की गई है।
शादियों पर खर्च सीमित करने के निर्देश तो दे सकती है सरकार
हाईकोर्ट ने कहा कि यह भी देखने में आया है कि किसान कई बार लोन की राशि को शादियों और ट्रैक्टर पर खर्च कर देते है, क्यों सरकार इस दिशा में कार्रवाई नहीं करती है। इस पर सरकारी वकील ने कहा की वह इस पर कुछ नहीं कर सकते। ऐसे में हाईकोर्ट ने कहा की सरकार इतना तो कर ही सकती है की शादियों पर किए जाने वाले खर्च को सीमित करने के निर्देश और मेहमानों की संख्या भी तय की जाय।
हाईकोर्ट ने कहा कि यह समस्या दिन-प्रतिदिन बढ़ती ही जा रही है। लिहाजा सरकार को इस दिशा में ठोस नीति बनानी होगी। हाईकोर्ट ने सरकार को इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने के बारे में जानकारी अगली सुनवाई पर देने के आदेश दिए हैं।