Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh
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2008 में जालंधर में दर्ज एफआईआर को रद्द करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि जांच को अनिश्चितकाल तक जारी रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती। संविधान प्रत्येक नागरिक को अधिकार देता है और तेजी से ट्रायल पूरा होना हर आरोपी का सांविधानिक अधिकार है।
याचिका दाखिल करते हुए परमिंदर सिंह ने हाईकोर्ट से उसके खिलाफ 2008 में दर्ज एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। याची ने बताया कि इस मामले में शिकायतकर्ता कश्मीर सिंह ने पुलिस को बताया था कि उसके दो ट्रकों में किसी ने आग लगा दी है और उसे पूरा विश्वास है कि यह याचिकाकर्ता ही है।
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पुलिस ने शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली लेकिन इस मामले में एसपी ने अपनी जांच में याची को बेकसूर पाया। ऐसे में पुलिस ने 2 जनवरी 2009 को जेएमआईसी की अदालत में अनट्रेस रिपोर्ट पेश कर दी। अदालत ने इसे नामंजूर करते हुए दोबारा जांच का आदेश जारी कर दिया। इसके बाद कई बार पुलिस ने इस मामले में अदालत में अनट्रेस रिपोर्ट पेश की, लेकिन जांच जारी रखने का आदेश मिलता रहा।
हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि वर्तमान मामले में जांच एजेंसी और संबंधित न्यायालय की निष्क्रियता को स्वीकार नहीं किया जा सकता। मामला 15 साल पुराना है और अभी तक इस मामले में जांच पूरी नहीं हुई है। ट्रायल तेजी से पूरा हो यह आरोपी का सांविधानिक अधिकार है और ऐसे में जांच अनिश्चितकाल तक जारी रखने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। ऐसे में हाईकोर्ट ने एफआईआर और अनट्रेस रिपोर्ट अस्वीकार करने के जेएमआईसी जालंधर के फैसले को रद्द करने का आदेश दिया है।