पंजाब सरकार द्वारा पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू ) से हरियाणा के कॉलेजों को जोड़ने और ग्रांट लेने के प्रस्ताव का विरोध करने पर हाईकोर्ट ने कड़ी टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने कहा कि अपने कर्मियों को वेतन देने के लिए आपके पास पैसा नहीं है तो पीयू की वित्तीय स्थिति कैसे सुधारेंगे। इस पर पंजाब सरकार ने पीयू की ग्रांट बढ़ाने संबंधी जवाब के लिए हाईकोर्ट से दो सप्ताह की मोहलत मांगी है।
गौरतलब है कि पीयू की खराब वित्तीय स्थिति को सुधारने के लिए हाईकोर्ट संज्ञान लेकर सुनवाई कर रहा है। बुधवार को सुनवाई के दौरान हरियाणा के कालेजों को पीयू से जोड़ने और ग्रांट लेने संबंधी प्रस्ताव पर पंजाब सरकार ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि यह मुद्दा पंजाब, केंद्र और पीयू के बीच का है। यूनिवर्सिटी की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए हरियाणा की जरूरत नहीं है हम इसके लिए सहयोग देंगे।
जस्टिस एके मित्तल एवं जस्टिस अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल की खंडपीठ के सामने सुनवाई शुरू होते ही पंजाब हायर एजुकेशन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव एसके संधू ने अपने हलफनामे के माध्यम से हरियाणा सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उन्होंने कहा कि हरियाणा अब अपने कॉलेज पीयू से जोड़ना चाहता है ताकि पीयू की बदहाल स्थिति का फायदा उठा कर वहां दखलंदाजी कर सके। पीयू के मौजूदा स्टेटस में कोई बदलाव पंजाब सरकार को स्वीकार नहीं है।
इसी बीच बताया गया कि हरियाणा द्वारा केंद्र को पीयू से हरियाणा के कॉलेज जोड़ने से जुड़ा जो प्रस्ताव भेजा गया थाउसपर पंजाब सरकार से उनकी राय मांगी गई थी। पंजाब सरकार ने इससे साफ इनकार कर दिया। हरियाणा ने प्रस्ताव दिया था कि वे पीयू को ग्रांट दे सकते हैं यदि उनके कुछ कॉलेज पीयू से जोड़ लिए जाएं।