हरियाणा सरकार के अस्थायी कर्मचारी की विधवा द्वारा अनुकंपा आधार पर नौकरी की मांग पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि अमूमन इस प्रकार के मामलों में कोर्ट दखल नहीं देता है। हालांकि इस मामले में कर्मचारी की विधवा व चार अनाथ बच्चे दयनीय स्थिति में हैं। हाईकोर्ट ने कर्मी की विधवा को नौकरी देने पर विचार करने का आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए भिवानी निवासी मृतक की विधवा सुनीता देवी ने हाईकोर्ट को बताया कि उसका पति हरियाणा सरकार में अस्थायी नौकरी पर था। 9 साल की सेवा देने के बाद उसकी दुर्घटना में मौत हो गई। पति की मौत के बाद याची ने अनुकंपा के आधार पर नौकरी देने का हरियाणा सरकार से अनुरोध किया। याची ने बताया कि उसका आवेदन इसलिए रद्द कर दिया गया क्योंकि उसका पति नियमित कर्मचारी नहीं था। पति की मौत के बाद याची व उसके चार बच्चे वित्तीय कठिनाई का सामना कर रहे हैं।
हाईकोर्ट ने याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि अमूमन कच्चे कर्मचारी की मौत की स्थिति में अनुकंपा आधार पर नौकरी को लेकर न्यायालय दखल नहीं देता है। इस मामले में याचिकाकर्ता और उसके चार नाबालिग बच्चे वित्तीय कठिनाई के कारण गरीबी में जीवन यापन कर रहे हैं। ऐसे में हरियाणा सरकार याची को किसी भी वर्ग में आवश्यकता के अनुरूप नौकरी प्रदान करने पर विचार करे। हाईकोर्ट ने कहा कि निर्णय लेने के लिए कम से कम समय लिया जाए।