हरियाणा के गैर अनुदान प्राप्त बीएड कालेजों की एसोसिएशन ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। मामले में एनसीटीई को नोटिस जारी हो गया है। नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) के साथ साथ चौधरी रणबीर सिंह यूनिवर्सिटी जींद से भी जवाब मांगा गया है।
बीएड कालेजों की एसोसिएशन ने उस नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उक्त संस्थानों ने गैर अनुदान प्राप्त सभी बीएड कालेजों से उनकी फेकल्टी व अन्य ढांचागत सुविधाओं की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए कहा है। जस्टिस जीएस संधावालिया की वेकेशन बेंच ने एनसीटीई और जींद की यूनिवर्सिटी को 8 जुलाई को जवाब देने को कहा है।
बीएड कालेजों की एसोसिएशन ने अपनी याचिका में कहा है कि एसोसिएशन के 500 से भी ज्यादा सदस्य कालेज पूरे राज्य में हैं। बीते 25 अप्रैल को हरियाणा सरकार ने जींद की यूनिवर्सिटी को राज्य से सभी बीएड कालेजों के लिए एकमात्र संबद्ध विश्वविद्यालय प्राधिकृत कर दिया। इसके तुरंत बाद 27 मई को यूनिवर्सिटी ने एनसीटीई को पत्र लिखकर मान्यता प्राप्त संस्थानों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने के लिए तीन माह का समय मांगा।
एसोसिएशन ने हाईकोर्ट को बताया कि तीन माह के समय की मांग इस दृष्टि से की गई थी कि उन सभी विश्वविद्यालयों जिनसे बीएड कालेज पहले संबद्ध थे, का प्रासंगिक रिकार्ड सुरक्षित कर लिया जाए। याचिका में आगे कहा गया है कि एनसीटीई ने इसके बावजूद 2 जून को सभी बीएड कालेजों के लिए नोटिस जारी कर 13 जून तक अपनी फेकल्टी व अन्य ढांचागत सुविधाओं का विवरण जमा कराने के आदेश दिए हैं।
नोटिस में यह भी कहा गया है कि यदि कोई कालेज मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराने में असफल रहता है तो उसके खिलाफ एनसीटीई एक्ट 1993 के सेक्शन 17 के अंतर्गत समुचित कार्रवाई करते हुए कालेज की मान्यता वापस ले ली जाएगी। याचिका में कहा गया है कि कालेजों की ओर से दाखिल की जा रही सूचना विश्वविद्यालय द्वारा पुनरीक्षित की जा रही है, जिसके लिए पहले ही तीन माह का समय मांगा गया था। एसोसिएशन ने याचिका में मांग की है कि कालेजों को मांगी गई जानकारी दाखिल करने के लिए और समय उपलब्ध कराया जाए।