हाईकोर्ट ने मोटर एक्सीडेंट क्लेम को लेकर फैसला सुनाते हुए कहा कि वाहन किराए पर देने की स्थिति में बीमा कंपनी की मुआवजे के लिए जिम्मेदारी नहीं बनती है। कोर्ट ने माना कि बीमा कंपनी और वाहन मालिक के बीच बीमा करते हुए करार होता है, इसके तहत यदि वाहन किसी और को दिया जाता है तो उसको लेकर आवश्यक संशोधन अनिवार्य है।
इन संशोधनों के अभाव में बीमा कंपनी की मुआवजे का भुगतान करने की जिम्मेदारी समाप्त हो जाती है। मामला सिरसा से जुड़ा है। सिरसा के को-ऑपरेटिव बैंक द्वारा रिकवरी केलिए किराए पर ली गई जीप से टक्कर के कारण एक व्यक्ति की मौत हो गई थी तथा एक अन्य व्यक्ति घायल को गया था। इसको लेकर मुआवजे के लिए याचिका दाखिल की गई थी।
सिरसा मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने घायल गुरचरण सिंह को 20 हजार तथा मृतक हरदेव सिंह के आश्रितों को डेढ़ लाख का मुआवजा मंजूर किया था। इस मामले में वाहन को-ऑपरेटिव बैंक ने हायर किया था तो ट्रिब्यूनल ने बैंक को मालिक मानते हुए बीमा कंपनी, मालिक तथा ड्राइवर को मुआवजे के लिए जिम्मेदार बताया था।
करार से बाहर जाकर किराए पर दिया वाहन
इस फैसले को बीमा कंपनी तथा को-ऑपरेटिव बैंक ने चुनौती दी थी। मामला हाईकोर्ट में पहुंचा और सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अहम आदेश जारी करते हुए कहा कि बीमा कंपनी के करार के बाहर जाकर वाहन को किराए पर दिया, इसलिए बीमा कंपनी की जिम्मेदारी नहीं रहती है।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने मालिक को ही मुआवजे के लिए जिम्मेदार माना। कोर्ट ने बीमा कंपनी को आदेश दिए कि वे पीड़ितों को मुआवजे का भुगतान कर इसकी रिकवरी को-ऑपरेटिव बैंक से करें। को-ऑपरेटिव बैंक को भुगतान करने के बाद जीप के असल मालिक या ड्राइवर से रिकवरी की छूट दी।