पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने साक्षी महाराज सहित अन्य नेताओं की ओर से न्यायपालिका पर की जा रही टिप्पणी को लेकर स्पष्ट कर दिया है कि अदालत आलोचना के लिए तैयार है, लेकिन किसी प्रकार का दबाव सहन नहीं किया जाएगा।
हाईकोर्ट के दो वकील नवीन चोपड़ा और जगबीर मलिक ने जनहित याचिका दाखिल करते हुए हरियाणा के शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा के बयान का मुद्दा उठाया। याची की ओर से कहा गया कि रामबिलास शर्मा ने कहा था कि डेरा समर्थकों पर धारा 144 नहीं लागू होती है।
उन्हें भोजन और पानी उपलब्ध करवाने के लिए वे बाध्य हैं। इसके साथ ही राम रहीम के जन्मदिन पर उन्हें 51 लाख अपने निजी कोष से रामबिलास शर्मा ने दिए जो जनता का पैसा था। ऐसे में इस पूरे मामले में राजनीतिक प्रतिनिधित्व ने राम रहीम का साथ दिया और इसलिए इस मामले की जांच सीबीआई से करवाई जानी चाहिए।
इसके साथ ही साक्षी महाराज सहित अन्य के हाईकोर्ट के खिलाफ दिए गए बयानों को अवमानना करार देते हुए इनके खिलाफ न्यायालय की अवमानना के तहत कार्रवाई करने की अपील की गई। साथ ही डीजीपी और पंचकूला के पुलिस कमिश्नर को तलब कर उनसे इस स्थिति पर जवाब मांगने की अपील की गई।
जस्टिस एसएस सरों और जस्टिस अवनीश झिंगान ने याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि जो लोग आलोचना कर रहे हैं, उन्हें करने दो, हमें उनकी परवाह नहीं। न्यायपालिका आलोचना सुनने को तैयार है, लेकिन यदि कोई आलोचना के माध्यम से न्यायपालिका पर दबाव बनाने का प्रयास करेगा तो उसे बिल्कुल भी सहन नहीं किया जाएगा।