पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट की एकल बेंच की ओर से हरियाणा में चौटाला शासनकाल के दौरान वर्ष 2000 में भरती 3206 शिक्षकों की नियुक्ति खारिज कर दिए जाने के बाद डिवीजन बेंच में सुनवाई के लिए पहुंचे शिक्षकों की याचिका पर सोमवार को भी सुनवाई जारी रही।
इस मामले में सीबीआई की ओर से भरती का पूरा रिकार्ड कोर्ट में पेश कर दिया गया। अदालत की ओर से आईएएस संजीव कुमार और भर्ती बोर्ड द्वारा जारी चयन सूचियों की समीक्षा की गई, जो अलग पाई गईं। इसके साथ ही सोमवार को सरकारी पक्ष ने इस मामले में बहस पूरी कर ली।
बहस के दौरान शिक्षकों के वकील ने डिवीजन बेंच से कहा कि इन शिक्षकों के मामले में भी हरियाणा सरकार और डिवीजन बेंच के उस रुख के अधीन फैसला लिया जाए, जिसमें 15 साल से नौकरी कर रहे याची टीचरों को नौकरी से हटाने की बजाय कोई ऐसा समाधान खोजा जाए कि शिक्षक बेरोजगार न हों।
वकील ने यह भी दलील दी कि इससे पहले भी हरियाणा सरकार ने कई मामलों में प्रभावित कर्मचारियों जिन्हें कोर्ट ने हटा दिया था, को अन्यत्र एडजस्ट किया था। वकील ने अदालत से कहा कि इस मामले में भी कुछ ऐसा ही किया जाए।
वहीं, शिक्षकों के वकील की दलीलों का विरोध करते हुए याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि इस भर्ती में धांधली हुई है और सीबीआई ने भी अपनी जांच में यह बात साबित कर दी है।
याचिकाकर्ता के वकील ने यह दलील भी दी कि इस मामले में मुख्य आरोपियों पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला व अन्य को सजा मिल चुकी है और उनकी सजा को सुप्रीम कोर्ट ने बहाल भी रखा है।
ऐसे में इन शिक्षकों को नौकरी पर कैसे रखा जा सकता है? उल्लेखनीय है कि इस मामले में एकल बेंच ने चौटाला शासनकाल वर्ष 2000 में भर्ती किए गए 3206 जेबीटी शिक्षकों की नियुक्ति रद्द करने का फैसला सुनाते हुए नई मेरिट लिस्ट बनाने का आदेश जारी किया था।