चंडीगढ़ में बढ़ते ट्रैफिक, पार्किंग, फुटपाथ जैसे कई विषयों पर प्रशासन के रवैये पर नाराजगी जताते हुए पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा कि शहर बिना दिमाग का इस्तेमाल किए चलाया जा रहा है। घर के बाहर ग्रीन एरिया बना या फेंसिंग कर अतिक्रमण करने वालों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कोर्ट ने एमसी, डीसी और एस्टेट ऑफिस को अतिक्रम हटा एक सप्ताह में इसकी रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि यदि किसी संस्थान की इमारत पार्किंग की जगह पर कब्जा कर रही है तो उसे भी गिरा दिया जाए। इस पर जो भी खर्च आए उसे अतिक्रमण करने वालों से वसूला जाए। जस्टिस अमोल रतन सिंह ने कहा कि यह जगह पैदल चलने वालों के लिए है, जिस पर लोगों ने कब्जा कर लिया है।
इस जगह पर अतिक्रमण होने के कारण लोग सड़कों पर वाहन खड़े करते हैं और सड़क पर कंजेशन बढ़ता है। हाईकोर्ट ने एसएसपी, एस्टेट ऑफिस और निगम को शहर के सभी रिहाइशी इलाकों में घरों के बाहर सड़क तक अतिक्रमण कर फेंसिंग आदि को तत्काल हटाने के आदेश दे दिए हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि अगर यह जगह खाली करवा ली जाए तो न सिर्फ इस जगह पर वाहन खड़े कर सड़कों को खाली किया जा सकता है बल्कि यह जगह पैदल चलने वालों के लिए रखी जा सकती है। सुनवाई के दौरान पार्किंग पॉलिसी पर भी हाईकोर्ट ने प्रशासन को फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि इतना लंबा समय बीत जाने के बाद भी प्रशासन की पार्किंग पॉलिसी तैयार क्यों नहीं है।
इलेक्ट्रिक ट्राम्स, बसों और मोनो-रेल पर करिए विचार
हाईकोर्ट ने कहा कि शहर में इलेक्ट्रिक ट्राम्स, बसें और मोनो-रेल जैसे प्रदूषण रहित पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर काम करने का समय आ गया है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम बेहतर होगा तो लोग अपने वाहनों का इस्तेमाल कम करेंगे। अगर मेट्रो महंगी योजना है तो मोनो-रेल पर गौर करें। इलेक्ट्रिक ट्राम्स और बसें भी विकल्प हो सकता है जिसके लिए अलग से मार्ग तय किया जाएं। इस मामले में कई विभागों से बेहतर तालमेल जरूरी है जिसके लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाए। प्रशासन डीसी या उनके समक्ष किसी अधिकारी को नोडल ऑफिसर नियुक्त करे। नोडल अधिकारी प्रशासन, निगम, चीफ आर्किटेक्ट, इंजीनियरिंग विभाग और टैफिक पुलिस से तालमेल कर हाईकोर्ट को सूचित करे।