पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ के कर्मचारियों के लिए बनाई सेल्फ फाइनेंस हाउसिंग स्कीम के फ्लैट्स के दाम बढ़ाने वाले पब्लिक नोटिस पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार सहित अन्य कर्मियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया कि यूटी प्रशासन और हाउसिंग बोर्ड ने कर्मियों के लिए फ्लैट्स उपलब्ध करवाने के लिए एक स्कीम निकाली थी। इस स्कीम के तहत 3930 फ्लैट्स दिए जाने थे, जिनके दाम बहुत कम थे। उस समय ए श्रेणी के लिए 24 से 34 लाख, बी के लिए 14 से 24 लाख, सी के लिए 11 से 13 लाख और डी के लिए 5.75 लाख रुपये मूल्य बताया गया था।
2008 की इस स्कीम को आगे बढ़ाते हुए फ्लैट्स के लिए एक निर्धारित राशि जमा करवा ली गई और यूटी और हाउसिंग बोर्ड इस पैसे पर ब्याज खाते रहे। योजना सिरे नहीं चढ़ी तो योजना रद्द करने का निर्णय कर लिया गया। इसके चलते कुछ कर्मियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। कई साल सुनवाई के दौर के बाद अब जाकर इस स्कीम को सिरे चढ़ाने की योजना बनाई गई लेकिन प्रशासन ने फ्लैटों के दाम इतने अधिक कर दिए कि यह कर्मचारियों की पहुंच से बाहर हो गए हैं।
याची ने बताया कि 3 बीएचके के लिए पौने दो करोड़, दो बीएचके के लिए सवा करोड़ से अधिक तथा 1 बीएचके के लिए एक करोड़ का दाम तय किया गया है। अब एक पब्लिक नोटिस जारी करते हुए बताया गया कि इस राशि का पांच किश्तों में भुगतान करना होगा और पहली किश्त के लिए 30 अगस्त की अंतिम तिथि तय की गई है। याची ने कहा कि ऐसा करना पूरी तरह से गलत है और पुराने दाम के अनुसार ही फ्लैट्स दिए जाने चाहिए।
हाईकोर्ट ने याची पक्ष को सुनने के बाद केंद्र सरकार, यूटी प्रशासन और चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड को नोटिस जारी कर पूछा था कि क्यों न इस पब्लिक नोटिस पर रोक लगा दी जाए। शुक्रवार को जवाब से असंतुष्ट हाईकोर्ट ने अब इस पब्लिक नोटिस पर रोक लगा दी है।