बच्चे के अपहरण के आरोपी द्वारा ट्रायल लंबा चलने की दलील देते हुए उच्च न्यायालय में नियमित जमानत के लिए दाखिल की गई याचिका पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने खारिज कर दी है। अदालत ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि आरोपी जघन्य अपराध में शामिल रहा है और ऐसे आरोपी ट्रायल लंबा चलने की दलील देकर नियमित जमानत का लाभ प्राप्त नहीं कर सकते।
जस्टिस महाबीर सिंधु ने यह टिप्पणी बठिंडा के सेंट जोसफ स्कूल के बाहर से फिरौती के लिए एक बच्चे का अपहरण करने के आरोपी की नियमित जमानत की मांग को लेकर दायर याचिका खारिज करते हुए की है। बच्चे के दादा ने ही इस मामले में पुलिस में दर्ज करवाई शिकायत में बताया था कि 27 सितंबर 2017 को जब वह सुबह 11 बजे अपने 12 वर्षीय पोते को जोकि सेंट जोसफ स्कूल में पढता था, उसे लेने गया तो उसने देखा कि वहां उसका ही एक पूर्व कर्मी कुछ अनजान युवकों के साथ उसके पोते को जबरदस्ती कार में बिठा कर ले जा रहा था।
दादा द्वारा शोर मचाने के बावजूद वह वहां से भागने में कामयाब रहे। दादा ने तत्काल पुलिस को इसकी शिकायत कर दी। कुछ देर बाद उन्हें अपहरणकर्ता ने फोन कर बच्चे के बदले शाम तक 50 लाख की फिरौती मांगी, लेकिन पुलिस बच्चे को बचाने में कामयाब रही और दोनों अपहरणकर्ताओं को पकड़ लिया, जिनके पास से एक पिस्तौल और गोलियां भी बरामद हुई थी, तब से दोनों आरोपी हिरासत में हैं।
इनमें से एक आरोपी ने अब हाईकोर्ट में याचिका दायर कर नियमित जमानत की मांग की थी और कहा था कि उनके खिलाफ चल रहा ट्रायल बेहद ही धीमी गति से चल रहा है, अभी तक गवाहियां भी पूरी नहीं हुई हैं। ऐसे में अब उसे जमानत दी जाए। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी के खिलाफ फिरौती को लेकर एक 12 वर्षीय मासूम के अपहरण का संगीन आरोप है, ऐसे में सिर्फ इस दलील पर कि ट्रायल में देरी हो रही है उसे जमानत नहीं दी जा सकती है।