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हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी- अगर ऐसे अपार्टमेंट बनते रहे तो चंडीगढ़ को दिल्ली बनते देर नहीं लगेगी

Wed, 19 Feb 2020 11:17 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
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चंडीगढ़ की इमारतों में अपनी हिस्सेदारी फ्लोर के रूप में बेच उसे अपार्टमेंट का रूप देने के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन को फटकार लगाई। साथ ही इस मामले में एडवाइजरी कमेटी को फैसला लेने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि ऐसा हुआ तो चंडीगढ़ में दिल्ली जैसे हालात बनने में देर नहीं लगेगी।
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इस बीच चंडीगढ़ प्रशासन ने अंडरटेकिंग दी कि प्रशासन अगली सुनवाई तक मंजिल के आधार पर कोई रजिस्ट्री नहीं करेगा। शहर में अपार्टमेंट कल्चर बढ़ने को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई आरंभ हुई तो याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि शहर में बिल्डर माफिया सक्रिय हैं और वे इमारतों को खरीद कर इसे फ्लोर के आधार पर बेच देते हैं।

अपार्टमेंट कल्चर बढ़ने से शहर पर बोझ बढ़ेगा और ऐसे में इसको रोका जाना चाहिए। इस पर प्रशासन की ओर से बताया गया कि शहर में अपार्टमेंट के तौर पर एक भी सेल डीड नहीं हुई है। प्रशासन ने कहा कि नियम के अनुसार कोई व्यक्ति अपने हिस्से को बेच सकता है और ऐसा करने पर रोक नहीं लगाई जा सकती, क्योंकि यह उसका अधिकार है। लंबे समय तक चली बहस के दौरान प्रशासन अपनी बात पर कायम रहा।
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...तो हर इमारत में मिलेंगे तीन अपार्टमेंट

इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि यदि ऐसे ही अनुमति दी जाती रहेगी तो एक दिन शहर की हर इमारत में तीन अपार्टमेंट मिलेंगे। इस प्रकार तो सेक्टरों पर अचानक बोझ बहुत अधिक बढ़ जाएगा। जनसंख्या घनत्व और पार्किंग का बोझ बढ़ने से व्यवस्था चरमरा जाएगी। इस पर प्रशासन ने कहा कि यदि किसी की प्रॉपर्टी मौजूद है और उसे अर्थिक मदद की आवश्यकता होती है तो कैसे उसे इसके लिए प्रॉपर्टी में उसका हिस्सा बेचने से रोका जा सकता है।

कोर्ट ने पूछा, रोकने के लिए कौन जारी करेगा आदेश
कोर्ट ने कहा कि यदि रोकना हो तो उसके आदेश जारी करने के लिए अथॉरिटी कौन है। प्रशासन ने बताया कि इसके लिए गृह विभाग से अनुमति जरूरी है। इस पर कोर्ट ने कहा कि इस मामले में हल निकालना जरूरी है। कोर्ट ने यह मामला एडवाइजरी कमेटी के सामने रखने और उनके सुझाव अगली सुनवाई पर कोर्ट को सौंपने के आदेश दिए हैं। इसके बाद फिर सुझावों के अनुरूप कोर्ट उचित निर्णय लेगा।
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