पेट में पलने वाला बच्चा मां की जिम्मेदारी होता है न की कोई सुविधा, जो नहीं चाहिए तो गिराने की अनुमति दे दी जाए। यह टिप्पणी पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक महिला द्वारा गर्भपात के लिए अनुमति हेतू दाखिल याचिका को खारिज करते हुए की है।
चंडीगढ़ निवासी महिला ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए कहा था कि अगर उसका बच्चा पैदा हुआ तो वह मानसिक रूप से तनाव में आ जाएगी। महिला ने कहा कि वह बच्चा पैदा करने के लिए मानसिक तौर पर तैयार नहीं है और ऐसे में हाईकोर्ट उसे गर्भपात की अनुमति दे।
इस याचिका पर हाईकोर्ट ने पीजीआई की रिपोर्ट मांगी तो बताया गया कि गर्भ की अवधि 24 सप्ताह से अधिक की है। साथ ही महिला और उसके बच्चे को कोई बीमारी नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि भ्रुण 24 सप्ताह से अधिक का है और गर्भपात की इजाजत नही दी जा सकती।
महिला व उसके भ्रुण को किसी भी तरह की गंभीर बीमारी नहीं है। ऐसे में केवल इस आधार पर की वह बच्चे का बोझ उठाने में मानसिक तौर पर तैयार नहीं है इसलिए गर्भपात की इजाजत नहीं दी जा सकती।