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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा : बेटी को अपवित्र करने वाला पिता रहम का हकदार नहीं, याचिका खारिज

Sun, 03 Apr 2022 01:56 AM IST
दुष्यंत शर्मा विवेक शर्मा, चंडीगढ़

सार

इस मामले में शर्मनाक बात यह है कि 8वीं कक्षा में पढ़ने वाली अपनी बेटी को ही पिता ने बनाया था हवस का शिकार। कुरुक्षेत्र ट्रायल कोर्ट की 13 साल की सजा को हाईकोर्ट ने रखा बरकरार।
 
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बच्चे पिता को शारीरिक व भावनात्मक रूप से रक्षक की तरह देखते हैं, लेकिन इस मामले में एक पिता ने अपनी वासना के लिए अपनी बेटी को ही अपवित्र कर दिया। इस तरह के कृत्य के दोषी व्यक्ति पर किसी भी प्रकार से रहम नहीं किया जा सकता। इन टिप्पणियों के साथ ही ट्रायल कोर्ट की ओर से सुनाई गई 13 साल की सजा को बरकरार रखते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पिता की अपील को खारिज कर दिया।

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कुरुक्षेत्र निवासी पिता ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया कि कुरुक्षेत्र की ट्रायल कोर्ट ने जून 2016 में उसे बेटी से दुष्कर्म का दोषी मानते हुए 13 साल की सजा सुनाई थी। आरोप के अनुसार याची अपनी पत्नी की गैर मौजूदगी में अपनी 8वीं में पढ़ने वाली 15 साल की बेटी से दुष्कर्म करता था। यह बात उसकी बेटी ने अपनी शिक्षिका को बताई थी, जिसके बाद शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की गई और जांच आरंभ हो गई। 

याची ने कहा कि इस मामले में उसे फंसाया जा रहा है और पुलिस के पास कोई ठोस सबूत भी नहीं है। इस मामले में पीड़िता बयान से मुकर चुकी है और ऐसे में याची को दोषी करार देने का फैसला गलत था। पीड़िता ने कोर्ट में कहा था कि उसे दुष्कर्म का मतलब नहीं पता है और न ही उसे शिकायत के बारे में जानकारी है। पुलिस ने जो कहा था, उसने वह लिख दिया था। उसके पिता ने उसे केवल कंधे पर हाथ रखकर घर के काम के लिए कहा था। 
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हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि इस मामले में पुलिस ने पीड़िता की दो शिक्षिकाओं के बयान भी दर्ज किए थे। बयान में उन्होंने कहा था कि पीड़िता ने बताया था कि उसका पिता उसके साथ चार बार दुष्कर्म कर चुका है। हाईकोर्ट ने कहा कि मौजूदा साक्ष्यों को देखते हुए पीड़िता के मुकरने के बाद भी पर्याप्त आधार मौजूद हैं, जिससे याची को दोषी करार दिया जा सके। हाईकोर्ट ने इसके साथ ही कुरुक्षेत्र की ट्रायल कोर्ट के फैसले पर मोहर लगाते हुए पिता द्वारा दाखिल अपील को खारिज कर दिया।

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