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मुफ्त तीर्थयात्रा योजना: हाईकोर्ट की पंजाब सरकार को सलाह-इन पैसों से युवाओं को ऑटो दिला दो.. रोजगार मिलेगा

Wed, 13 Dec 2023 08:32 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

होशियारपुर निवासी परविंदर सिंह किटाना ने अपने वकील एचसी अरोड़ा के माध्यम से 27 नवंबर को शुरू की गई मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना को चुनौती दी थी। सरकार की मंशा इस योजना के माध्यम से 50 हजार लोगों को मुफ्त तीर्थ यात्रा करवाने की है और इसमें कुल 40 करोड़ रुपये खर्च होगा जो करदाताओं के पैसे की बर्बादी है।
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पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट
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विस्तार
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने एक बार फिर पंजाब सरकार की मुफ्त तीर्थ यात्रा योजना पर सवाल उठाया है। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि योजना गलत नहीं है, लेकिन इस पर करोड़ों खर्च करने से पहले सरकार एक बार राज्य की दशा भी देखे। 
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कोर्ट ने कहा कि ऐसी योजना से क्या भलाई होगी, यदि यह पैसा बेरोजगारों को ऑटो दिलाने में खर्च कर दिया जाता तो उनके लिए जिंदगी भर के रोजगार का इंतजाम हो जाता। हाईकोर्ट ने अब इस मामले में दो सप्ताह में पंजाब सरकार को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।

यह भी पढ़ें: पंजाब में तिरपाल घोटाला: 107 करोड़ में की गई थी खरीद, एक्शन में आए सीएम, टेंडर रद्द कर मांगी रिपोर्ट
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27 नवंबर को हुई थी शुरू
होशियारपुर निवासी परविंदर सिंह किटाना ने अपने वकील एचसी अरोड़ा के माध्यम से 27 नवंबर को शुरू की गई मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना को चुनौती दी थी। सरकार की मंशा इस योजना के माध्यम से 50 हजार लोगों को मुफ्त तीर्थ यात्रा करवाने की है और इसमें कुल 40 करोड़ रुपये खर्च होगा जो करदाताओं के पैसे की बर्बादी है। सर्वोच्च न्यायालय ने भारत सरकार व अन्य बनाम रफीक शेख मामले में 2022 में मुस्लिम समुदाय के लोगों को हज यात्रा के लिए सब्सिडी कम करने और 10 साल में पूरी तरह खत्म करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा था कि यह पैसा वंचितों के उत्थान के लिए खर्च किया जाना चाहिए।

सरकार का पक्ष- कई राज्यों में चल रही ऐसी योजना
सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने बताया कि मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश के अलावा कई अन्य राज्यों में ऐसी योजना चल रही है। इसके लिए केवल 40 करोड़ रुपये ही रखे हैं। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि आम लोगों के पैसे कैसे इस तरह को स्कीम में लगाए जा रहे हैं, यह राशि अन्य कामों में लगाई जा सकती है। राज्य की जेलों का बुरा हाल है, वहां क्यों नहीं कोई स्कीम लाई जाती। 
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अदालत ने कहा कि भावी पीढ़ी को शिक्षा और रोजगार की जरूरत है, उस पर पैसे क्यों नहीं खर्च होते। यदि सरकार इस पैसे से ऑटो खरीद बेरोजगारों को दे दिया जाए तो उसके जीवन भर के रोजगार का इंतजाम हो जाएगा। इस पर सरकार की तरफ से बताया गया कि हम संतुलन बनाने की कोशिश करेंगे। सरकार ने बताया, एक रेल यात्रा पर जा चुकी है, पर दूसरी की टिकट बुक हो चुकी हैं। कुछ देर चली बहस के बाद हाईकोर्ट ने फिलहाल बिना कोई निर्देश दिए सुनवाई दो हफ्तों के लिए स्थगित कर दी।
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