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हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन और पुलिस को दिए थे 7 काम करने के आदेश, एक भी काम पूरा नहीं

Fri, 17 Jan 2020 10:40 AM IST
खुशबू गोयल रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
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पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की फटकार भी चंडीगढ़ प्रशासन के अधिकारियों को नींद से नहीं जगा पा रही। शहर के साइकिल ट्रैकों की खराब हालत को लेकर शुक्रवार को पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन और चंडीगढ़ पुलिस को 16 जनवरी तक सात कामों को पूरा करने के आदेश दिए थे लेकिन प्रशासन और पुलिस इनमें से एक भी काम को पूरा नहीं कर पाए हैं।
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चार अक्टूबर 2019 को हाईकोर्ट में पिछली सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने टूटे ट्रैक को रिपेयर करने, लाइट प्वाइंट्स पर एचडी सीसीटीवी कैमरे लगाने जैसे कई आदेश जारी किए। अब इन आदेशों को तीन महीने बीत चुके हैं लेकिन प्रशासन और पुलिस हाईकोर्ट के एक भी आदेश को पूरा नहीं कर पाई है। पिछली सुनवाई पर हाईकोर्ट ने सभी आदेशों को पूरा कर सभी के एफिडेविट कोर्ट में दाखिल करने के आदेश दिए थे।

ऐसे में सवाल उठता है कि जब साइकिल ट्रैक के हालत जस के जस हैं, न सीसीटीवी कैमरे लगे हैं और न ही पुलिस के अधिकारी मोटरसाइकिलों को साइकिल ट्रैक पर जाने से रोक पाए हैं, तो वह कोर्ट में क्या जवाब देंगे। अमर उजाला ने हाईकोर्ट के सभी आदेशों पर चंडीगढ़ पुलिस और यूटी प्रशासन की तरफ से किए गए कामों की पड़ताल की।
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ये सात काम करने को कहे गए थे

पहला काम : कोई भी गाड़ी साइकिल ट्रैक और फुटपाथ पर न खड़ी हो। अगर ऐसा होता है तो इसके लिए एसएसपी जिम्मेदार होंगे।
हकीकत :
इन आदेशों की धज्जियां हाईकोर्ट के पास ही रोजाना वकीलों द्वारा ही उड़ाई जाती है। रॉक गार्डन से हाईकोर्ट की तरफ जाने वाली सड़क के साइकिल ट्रैक पर रोजाना कारें खड़ी होती हैं, वह भी रांग साइड से लेकिन पुलिस मौन रहकर सब देखती रहती है। हाईकोर्ट में नो पार्किंग का जहां बोर्ड लगा रहता है, सबसे ज्यादा गाड़ियां वहीं खड़ी की जाती हैं। आईएसबीटी-43 के पास भी साइकिल ट्रैक को ही पार्किंग बना लिया गया है।

दूसरा काम: कोई भी मोटरसाइकिल और स्कूटर साइकिल ट्रैक पर न जाए। साइकिल ट्रैक के शुरुआत और आखिर में साइन बोर्ड लगाएं जाएं।
हकीकत :
साइन बोर्ड नहीं लगाए गए हैं। मध्य मार्ग, जन मार्ग और दक्षिण मार्ग पर आसानी से मोटरसाइकिल और स्कूटरों को साइकिल ट्रैक पर चलते हुए देखा जा सकता है। लाल बत्ती से बचने के लिए कई स्कूटर सवार साइकिल ट्रैक पर चढ़कर रास्ते को पार करते हैं। पुलिस इसे रोक पाने में असफल रही है।

तीसरा काम: तीन महीने के अंदर शहर के विभिन्न स्लिप रोड पर पीले बाक्स अंकित किए जाएं, जिससे स्लिप रोड के लिए लोगों को रास्ता मिल सके।
हकीकत :
दक्षिण मार्ग पर कुछ जगह सड़क पर पीले बाक्स अंकित कर दिए गए हैं लेकिन अन्य स्लिप रोड से यह नदारद है। दक्षिण मार्ग पर भी जिन स्लिप रोड पर पीले बाक्स बनाए गए हैं, लोगों में जागरूकता की कमी की वजह से लोग उन पर ही खड़े रहते हैं।
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चौथा काम: तीन महीने के अंदर लाइट प्वाइंट और संवेदनशील प्वाइंट्स पर एचडी कैमरे लगवाएं।
हकीकत :
एक भी लाइट प्वाइंट पर एचडी कैमरे नहीं लगाए गए हैं। कुछ कैमरे पहले से लगे हुए हैं लेकिन उनकी क्वालिटी काफी खराब है। जानकारी के अनुसार पुलिस की तरफ से एचडी कैमरे लगाने के लिए प्रस्ताव भेजा गया है लेकिन वह भी अभी ठंडे बस्ते में है।

पांचवां काम: शहर के दक्षिणी सेक्टर के साइकिल ट्रैक का किसी तरह दुरुपयोग न हो। उत्तरी सेक्टरों की तर्ज पर ही सभी मानकों का ध्यान रखा जाए।
हकीकत :
शहर के दक्षिणी सेक्टरों को प्रशासन ने नजरअंदाज किया है। सेक्टर-43ए में जिस दिन भी मंडी लगती है। लोग साइकिल साइकिल ट्रैक पर ही कारें पार्क करते हैं। सेक्टर-43डी में एक साइकिल ट्रैक पिछले एक साल से बन ही रहा है।

छठा काम: छह महीने के अंदर सभी साइकिल ट्रैक और फुटपाथ को रिपेयर कराएं।
हकीकत :
इस काम को पूरा करने के लिए तीन महीने का समय अभी बाकी है लेकिन अभी तक काम शुरू नहीं किया गया है। कुछ जगह मिट्टी भरकर खानापूर्ति कर दी गई है।

सातवां काम: सभी ऑटो चालक मीटर के अनुसार ही किराया लें।
हकीकत :
ट्रैफिक एसएसपी को इसके लिए तीन हफ्ते का समय दिया गया था। तीन महीने बाद भी शहर का एक भी ऑटो मीटर के हिसाब से नहीं चलता है। चेकिंग से बचने के लिए ऑटो चालक मीटर को चालू करके रखते हैं लेकिन सवारियों से किराया मनमाना ही वसूल किया जाता है।
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