पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कहा है कि अंगों के इंतजार में किसी की जान नहीं जानी चाहिए। कोर्ट ने पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ व केंद्र सरकार को अंग-प्रत्यारोपण के नियमों को सरल बनाने के लिए पीजीआई की 16 सिफारिशों को लागू करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट के आदेश पर ही पीजीआई के विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमेटी ने यह सुझाव दिए थे जिन्हें अब प्रावधान बनाने के आदेश दिए गए हैं। कमेटी ने कहा था कि अंग-प्रत्यारोपण के नियमों को सरल बनाने के साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि यह व्यापार न बन जाए।
पीजीआई चंडीगढ़ के 9 विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमेटी ने डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया था कि भारत में प्रतिवर्ष 2 हजार से अधिक लोग चंद पैसों के लिए अंग दान कर देते हैं। अंगदान प्रक्रिया को इस प्रकार सरल बनाना चाहिए कि यह जनहित के लिए हो न कि इसका व्यापार की तरह इस्तेमाल हो। सुझाव दिया गया कि चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा के सभी अस्पतालों में ब्रेन डेड मरीजों को सर्टिफिकेट जारी किया जाए और इनका रिकॉर्ड रखा जाए। जैसे तमिलनाडु ने जिला स्तरीय कमेटी बनाकर केंद्र सरकार की सहायता से काउंसलरों की नियुक्ति की है।
उसी तर्ज पर चंडीगढ़, पंजाब और हरियाणा में भी जिला स्तर पर ऐसी कमेटियों का गठन किया जाना चाहिए ताकि काउंसलर ब्रेन डेड मरीजों के परिजनों और रिश्तेदारों को उनकी सहमति से अंगदान के लिए प्रेरित कर सकें। काउंसलरों को सभी सरकारी और निजी अस्पतालों के ब्रेन डेड मरीजों के रिश्तेदारों से संपर्क करने का मौका दिया जाना चाहिए। अंग-प्रत्यारोपण से जुड़ी पूरी प्रक्रिया के बारे में सभी जांच अधिकारी और एसएचओ को ट्रेनिंग दी जानी चाहिए ताकि अंगदान प्रक्रिया में देरी न हो।
अंग-प्रत्यारोपण के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया है और पंजाब और हरियाणा का एक भी अस्पताल इसके लिए रजिस्टर नहीं है। कमेटी ने सुझाव दिया है कि कम से कम 25 बेड के अस्पताल, जहां आईसीयू और अच्छे ऑपरेशन थिएटर हैं उनका अंग प्रत्यारोपण के लिए रजिस्ट्रेशन किया जाए।