चंडीगढ़ नगर निगम की सदन बैठक में हुए हंगामे का शोर चंडीगढ़ सचिवालय में भी गूंजा। सदन की बैठक का बहिष्कार कर कमिश्नर केके यादव बुधवार को दोपहर में ही प्रशासक के सलाहकार मनोज परिदा से मिलने पहुंच गए। उन्होंने सलाहकार को बैठक में घटी सारी घटना की जानकारी दी और कहा कि पार्षद बदतमीजी पर उतर आए हैं।
पार्षदों का यही रवैया रहा तो वह यहां से चले जाएंगे। नगर निगम की सदन की बैठक में हुई इस घटना को लेकर एडवाइजर मनोज परिदा ने भी पार्षदों को अपने दायरे में रहकर काम करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि शहर के पार्षदों को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। जनप्रतिनिधि और अधिकारियों का पद, दोनों ही सांविधानिक पद हैं और दोनों की अपनी गरिमा है।
पार्षदों को मर्यादा में रहकर अपना कार्य करना चाहिए। अगर जनप्रतिनिधि और अधिकारी आपस में उलझेंगे तो शहर का ही नुकसान होगा। लोगों के काम रुकेंगे, उन्हें परेशानी झेलनी पड़ेगी। इससे दोनों की छवि खराब होगी। एडवाइजर ने कहा कि पार्षदों और अधिकारियों में एक दूसरे के प्रति आदर की भावना होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रशासन यह नहीं चाहता कि किसी कारण जनता के काम रुके इसलिए सभी अपने दायरे में रहकर ही काम करें। वहीं, प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि पार्षदों को सोच समझ कर किसी भी अधिकारी से बात करनी चाहिए। आईएएस अफसर बनने में बेहिसाब मेहनत लगती है।