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पंजाब-हरियाणा और चंडीगढ़ तलब, सवाल- ध्वनि प्रदूषण करने वालों पर क्यों न दर्ज हो एफआईआर

Wed, 29 May 2019 11:08 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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नोटिस - फोटो : फाइल फोटो
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण को लेकर बनाई गई कमेटी के सुझावों पर हरियाणा, पंजाब और यूटी से जवाब तलब कर लिया है। कमेटी ने  बार-बार ध्वनि प्रदूषण के दोषी के खिलाफ न्यायालय की अवमानना की कार्रवाई और एफआईआर दर्ज करने का सुझाव दिया है। सीनियर एडवोकेट एमएल सरीन, अक्षय भान और रीटा कोहली सहित अन्य की कमेटी ने जो सुझाव सौंपा है उसमें कहा कि ध्वनि प्रदूषण को स्वच्छ भारत अभियान के तहत लाया जाना चाहिए।
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इसके साथ ही लोगों को जागरूक करना होगा कि इसका मानव सहित पशु व पक्षियों पर कितना खतरनाक प्रभाव पड़ता है। धार्मिक संस्थानों में श्री अकाल तख्त साहित के हुकुमनामे की तर्ज पर व्यवस्था हो जिसके अनुसार ध्वनि इतनी हो कि गुरुद्वारा परिसर में ही रहे। साथ ही जहां पर नियमों का उल्लंघन हो वहां जिम्मेदारी तय की जाए और चीफ सेक्रेटरी व डीजीपी इसकी निगरानी रखें। सभी संस्थानों में नॉयज मॉनिटरिंग का सिस्टम हो ताकि वह इसे कंट्रोल कर सकें।

इसके साथ शिकायतों के लिए एक हॉट लाइन हो और इसमें आने वाली शिकायतों पर कार्रवाई के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर बनाया जाए। आने वाली सभी शिकायतों का रिकार्ड रखा जाए और इसे सप्ताहिक रूप से डीजीपी व मुख्य सचिव को भेजा जाए। पहली बार ध्वनि प्रदूषण के दोषी को चेतावनी देकर छोड़ने, दूसरी बार कानून के अनुरूप कार्रवाई और तीसरी बार पर न्यायालय की अवमानना व एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की गई है। इसके साथ ही पीसीआर में नॉयज मॉनिटरिंग सिस्टम अनिवार्य करने का भी सुझाव है।
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चंडीगढ़ के कम्युनिटी सेंटर को लेकर सुझाव
कमेटी ने सुझाव दिया कि जब कि कम्युनिटी सेंटर बुक किया जाए तो एक निधारित राशि सिक्योरिटी के तौर पर रखी जाए। यदि ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियमों का उल्लंघन हो तो उस स्थिति में इस राशि को जब्त करने का प्रावधान रखा जाना चाहिए।
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