इसके अतिरिक्त भारतीय दंड संहिता की धारा 363(2) के प्रावधान के अनुसार वह फैसले का हिंदी अनुवाद लेने का अधिकारी है। वशिष्ठ की इस अपील पर हाईकोर्ट ने उनको निर्णय का हस्तलिखित हिंदी अनुवाद उपलब्ध करवा दिया।
हाईकोर्ट में हिंदी में आदेश की मांग कई दिनों तक जजों के बीच चर्चा का विषय रही। आखिरकार आदेश हिंदी भाषा में उपलब्ध करवाने का निर्णय ले लिया गया। अब समस्या हिंदी में टाईप को लेकर थी। ऐसे में कोर्ट ने आदेश उपलब्ध करवाने के लिए कागज पर इसे लिखकर सौंपने का निर्णय लिया।