ग्राम गोरखपुर में परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगाने के लिए किसानों की भूमि का अधिग्रहण करने के बावजूद उनके परिवार में किसी को नौकरी न देने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को जमकर फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कहा कि सरकार ने जब आजीविका ली तो कैसे नौकरी से इनकार कर सकती है। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को तीन माह के भी किसानों की मांग पर निर्णय लेने के आदेश दिए हैं।
हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए प्रोमिला व अन्य ने बताया कि याचिकाकर्ताओं की भूमि न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) द्वारा हरियाणा सरकार के माध्यम से अधिगृहीत की गई थी। भूमि अधिग्रहण हरियाणा सरकार की स्वीकृति और सहमति से हुआ था। ऐसे में सरकार इस मामले में यह कह कर पीछे नहीं हट सकती कि इस जमीन का राज्य सरकार ने अधिग्रहण नहीं किया है।
इससे पहले हरियाणा सरकार ने इस आधार पर दावे को खारिज कर दिया था कि राज्य सरकार द्वारा नौकरी प्रदान करना संभव नहीं है, क्योंकि यह जमीन केंद्र सरकार की एनपीसीआईएल की परियोजना के लिए अधिगृहीत की गई थी।
हरियाणा सरकार ने अपनी ही नीति पर गौर नहीं किया
याचिकाकर्ताओं के वकील संदीप गोयत ने हाईकोर्ट को बताया कि पहले भी हाईकोर्ट ने पूर्व में दाखिल याचिका का निपटारा करते हुए हरियाणा सरकार को याचिकाकर्ताओं की मांग पर निर्णय लेने के आदेश दिए थे। हरियाणा सरकार ने केंद्र पर सारी जिम्मेदारी डालते हुए मांग को खारिज कर दिया था।
गोयत ने कोर्ट को बताया कि याची के दावे को खारिज करते हुए हरियाणा सरकार ने खुद अपनी नीति पर ही गौर नहीं किया जिसके तहत याचिकाकर्ता नौकरी के लिए पात्र हैं। नीति के अनुसार यदि किसी परियोजना के लिए जमीन का अधिग्रहण किया जाता है तो भूमि मालिकों की जीविका पर प्रभाव न पड़े, इसके लिए भूस्वामी परिवार के एक आश्रित को सरकारी नौकरी दी जाए।