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मुल्तानी हत्याकांडः पूर्व डीजीपी सैनी को राहत बरकरार, पंजाब सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस

Thu, 15 Oct 2020 10:04 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • हाईकोर्ट का आदेश- किसी भी कार्रवाई से सात दिन पहले देना होगा नोटिस
  • अगली सुनवाई 3 नवंबर को, अब मामले को तथ्यों के आधार पर सुना जाएगा
  • नई एफआईआर निरस्त करने की मांग, सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार से मांगा जवाब
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी को दी गई राहत पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने 3 नवंबर तक बरकरार रखी है। उनके पूरे सेवाकाल में दर्ज किसी भी मामले में कार्रवाई से पहले उन्हें सात दिन का नोटिस जारी करने के आदेश को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई 3 नवंबर तक बढ़ा दिया है।

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बुधवार को पंजाब सरकार ने सैनी द्वारा 2018 में दायर याचिका पर भी जल्द सुनवाई की मांग की और दोनों ही याचिकाओं की वैधता पर सवाल उठाए। हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस मामले को तथ्यों के आधार पर सुना जाएगा। 2018 की याचिका पर सुनवाई मौजूदा याचिका, जिसमें पूरे सर्विस कैरियर के लिए सैनी ने राहत मांगी है ।

सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने कहा 11 मई को सैनी के खिलाफ दायर एफआईआर में जब धारा-302 जोड़ी गई थी, उसके बाद सैनी की जमानत और इस एफआईआर को रद्द करने की मांग हाईकोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सैनी को अग्रिम जमानत दी है।
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हाईकोर्ट ने इस केस को छोड़कर अन्य सभी केसों के लिए सैनी को राहत दी है, क्योंकि यह मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है । कुछ देर चली बहस के बाद हाईकोर्ट ने अब सैनी की दोनों याचिकाओं पर जारी अंतरिम आदेशों को बरकरार रखते हुए 3 नवंबर के लिए सुनवाई स्थगित कर दी है। 

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सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार से जवाब मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को पंजाब के पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सुमेध सिंह सैनी की उस याचिका पर पंजाब सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा जिसमें सैनी ने अपने खिलाफ दर्ज नई एफआईआर निरस्त करने की मांग की है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में पंजाब सरकार को आगे की कार्रवाई न करने के लिए कहा है।

नई एफआईआर 1991 में आईएएस के बेटे बलवंत सिंह मुल्तानी की हत्या के मामले में संबंधित है। जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह की पीठ के समक्ष पंजाब सरकार ने कहा कि वह अगली तारीख पर पक्ष रखेगी। इसके बाद पीठ ने कहा, सरकार चार हफ्ते में जवाब दाखिल करे।

पीठ ने इस मामले में आगे की कार्रवाई करने से मना किया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने आठ सितंबर को याचिकाकर्ता की उस दलील को खारिज कर दिया था जिसमें कहा गया था कि मुकदमे को निरस्त किया जाए या फिर केस सीबीआई को ट्रांसफर किया जाए। पूर्व पुलिस महानिदेशक ने हाईकोर्ट के इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
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