विवाह के रजिस्ट्रेशन से जुड़े आवेदन के रद्द होने के बाद दंपती ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि फिलहाल लड़के की आयु 21 वर्ष से अधिक है और किसी भी पक्ष ने विवाह को अवैध करार देने से जुड़ा कोई आवेदन नहीं किया गया है।
जब विवाह को अवैध करार देने से जुड़ा कोई आवेदन मिला ही नहीं है और अब वर-वधु दोनों बालिग हैं। इसलिए विवाह के रजिस्ट्रेशन में कोई अड़ंगा नहीं लगाया जाना चाहिए। इस मामले में जब हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से जवाब मांगा तो सरकार की ओर से कोई ठोस जवाब नहीं दिया गया।
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इसके बाद हाईकोर्ट ने कहा कि हिंदू मैरिज एक्ट के तहत न्यूनतम आयु का उल्लंघन करके की गई शादी रद्द करने योग्य है, लेकिन निष्प्रभावी नहीं। दोनों में से कोई भी इस विवाह से अलग भी नहीं होना चाहता है। इसके बाद हाईकोर्ट ने सरकार को दोनों का विवाह दो सप्ताह में रजिस्टर किए जाने के आदेश दे दिए।