हरियाणा के सरकारी कॉलेजों के प्रोफेसरों की वरिष्ठता सूची नए सिरे से तैयार किए बिना की गई प्रमोशन के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं। इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में दायर अवमानना याचिका में बताया गया कि पहले उनकी नियुक्ति एड-हॉक पर की गई थी और बाद में उन्हें रेगुलर किया गया। काफी वर्षों तक सेवा के बाद जब प्रमोशन का समय आया तो उनसे जूनियर प्रोफेसरों को प्रमोशन दे दी गई जिनकी उनके बाद सीधे नियुक्ति की गई थी।
याचिकाकर्ताओं ने अपने एड-हॉक के सेवाकाल को भी अनुभव शामिल कर उनकी सीनियारिटी तय कर प्रमोशन दिए जाने की मांग की जिसे सरकार ने 2010 में अस्वीकार कर दिया। सरकार के इस निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती दे दी गई और हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार कर ली। इसके साथ ही सितंबर 2010 में सरकार को आदेश दिए कि वह एड-हॉक के कार्यकाल को भी सेवाकाल में शामिल कर सीनियारिटी लिस्ट बनाए और उसी के आधार पर प्रमोशन दे।
हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद भी सरकार ने उनके एड-हॉक के कार्यकाल को शामिल नहीं किया बल्कि हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे दी। नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की अपील खारिज कर दी। इस अपील के खारिज हो जाने के बाद अभी हाल ही में छह जनवरी को फिर याचिकाकर्ताओं के एड-हॉक को शामिल किए बिना उनके जूनियर प्रोफेसरों की प्रमोशन के आदेश जारी कर दिए।
सरकार के इस निर्णय को फिर हाईकोर्ट में चुनौती दे दी गई। पहले जस्टिस ऋतू बाहरी ने इस याचिका पर सुनवाई की और कहा कि यह तो सीधे तौर पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना का मामला है। इस मामले को लेकर सरकार के खिलाफ अवमानना की याचिका दायर की जानी चाहिए। अब याचिकाकर्ताओं ने इस मामले को लेकर सरकार के खिलाफ अवमानना याचिका दायर कर दी है जिस पर जस्टिस सुरिंदर गुप्ता ने सरकार को 20 फरवरी को मामले में जवाब दिए जाने के आदेश दे दिए हैं।