पीजीटी और हेड मास्टरों की वरिष्ठता सूची पर आपत्तियों का निपटारा करने के आदेश पूरा होने से पहले ही वरिष्ठता सूची एक सप्ताह में मंगवा लेने को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने दोहरा रवैया मानते हुए डीजी सेकेंडरी एजुकेशन को तलब कर लिया है। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि डीजी सफाई नहीं दे पाए तो वह मोटे जुर्माने केलिए तैयार रहें। साथ ही हाईकोर्ट ने प्रमोशन की प्रक्रिया पर भी रोक लगा दी है।
हरियाणा के शिक्षकों की ओर से बताया गया कि हरियाणा में प्रिंसिपल पद पर प्रमोशन के लिए हरियाणा सरकार ने बिना वरिष्ठता सूची को अंतिम रूप दिए इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी है। याची ने बताया कि 5 जुलाई 2017 को प्रभावी पीजीटी और 1 जून 2015 को प्रभावी हेड मास्टरों की वरिष्ठता सूची को अंतिम रूप नहीं दिया गया है और अभी भी इसमें आपत्तियां लंबित हैं। सरकार ने 21 जून को संबंधित अधिकारियों को पत्र लिख इन आपत्तियों का निपटारा करने के आदेश दिए।
इस आदेश को एक सप्ताह भी नहीं बीता था कि 26 जून को एक नया पत्र जारी कर सभी जिला शिक्षा अधिकारियों से प्रमोशन के लिए नाम मांग लिए गए। याची ने कहा कि बिना वरिष्ठता सूची को अंतिम रूप दिए प्रमोशन के लिए नाम मांगना कानून के अनुरूप सही नहीं है। एक अन्य मामले में सुनवाई के दौरान डीजी खुद मान चुके हैं कि 5 अप्रैल 2017 की वरिष्ठता सूची को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। हाईकोर्ट के समक्ष जब यह जानकारी रखी गई तो कोर्ट ने इसपर हैरानी जताते हुए कहा कि कैसे एक मामले मे दोहरा रुख अपनाया जा सकता है।
हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को इस बारे में औपचारिक नोटिस जारी करते हुए डीजी स्कूल एजुकेशन को तलब कर लिया है। कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई पर उन्हें बताना होगा कि उनके द्वारा जारी किए यह दो पत्र कैसे एक समय पर जायज हैं। यदि वह जवाब नहीं दे पाए तो कोर्ट मोटा जुर्माना लगाने से पीछे नहीं हटेगा।