पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बेहद अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि पंचायती समझौते से कानूनी अधिकार को समाप्त नहीं किया जा सकता।
रेलवे एक्सीडेंट के एक मामले में हाईकोर्ट ने मृतक के परिजनों को मुआवजा जारी करने के आदेश देते हुए इस राशि का एक हिस्सा मृतक की पत्नी को भी जारी करने के आदेश दिए हैं।
कोर्ट को बताया गया था कि नारायणगढ़ निवासी मृतक की पत्नी ने पंचायती समझौता किया था कि वह पति की मौत के बाद मायके में रहना चाहती है और अब उसका ससुराल से कोई लेना-देना नहीं होगा।
कोर्ट ने कहा कि ऐसे समझौते से किसी के कानूनी अधिकार को समाप्त नहीं किया जा सकता। पति की मौत के कारण ही पत्नी को घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा और इससे उसकी जिंदगी भी प्रभावित हुई। ऐसे में वह मुआवजे की निश्चित तौर पर हकदार है।