अपने भाई की पत्नी से जबरदस्ती करने के आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने कहा कि अपनी भाभी से इस तरह का कृत्य करने वाले को अग्रिम जमानत का कोई अधिकार नहीं है।
मेरठ निवासी सुहैल अहमद ने याचिका दाखिल करते हुए अग्रिम जमानत दिए जाने की मांग की थी। याची के भाई की पत्नी ने फरीदाबाद पुलिस को शिकायत देते हुए बताया था कि 23 अगस्त 2018 को उसका विवाह हुआ था। विवाह के बाद से ही ससुराल वाले दहेज के लिए उसे परेशान कर रहे थे।
इसके बाद वह अपने पति के साथ अलग रहने लगी। 30 अक्तूबर 2019 को जब उसका पति घर पर मौजूद नहीं था तब याची जबरन कमरे में घुस गया और जबरदस्ती की। इसके बाद जाते हुए धमकी दी कि यदि किसी को बताया तो वह उसके मां-बाप को मार देगा। जब शिकायतकर्ता का पति लौटा तो उसने सारी बात उसे बताई। महिला का कहना था कि शिकायतकर्ता का साथ देने की बजाय उसके पति ने उसे पीटना शुरू कर दिया। तब से वह पति से अलग रह रही है।
फरीदाबाद फास्ट ट्रैक ने भी खारिज कर दी थी अग्रिम जमानत याचिका
हाईकोर्ट को बताया गया कि 13 जनवरी 2021 को फरीदाबाद की फास्ट ट्रैक कोर्ट भी याची की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर चुकी है। हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस प्रकार का कृत्य करने का आरोपी अग्रिम जमानत का हकदार नहीं है।
अग्रिम जमानत का हक मासूमों को प्रताड़ना से बचाने के लिए दिया गया है जिसका प्रयोग अपराधियों को गिरफ्तारी से बचाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।