पुलिस ने विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज कर आरोपियों को गिरफ्तार किया था। सत्र न्यायालय ने 15 जुलाई को वर्तमान याचिकाकर्ता तोमर को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप चौहान ने अपने आदेश में कहा था कि भारत जैसे महान देश में कुछ असामाजिक तत्व ऐसे भी हैं जो अपने तुच्छ लक्ष्यों और गलत विचारधाराओं के कारण समाज के सामाजिक ताने-बाने को कलंकित करने का प्रयास करते हैं। उन्होंने कहा था कि कोई भी सामान्य विवेकशील व्यक्ति, जिसके दिल में थोड़ी सी भी देशभक्ति हो, ऐसा अपराध करने की हिम्मत नहीं कर सकता।
इसके बाद मामला हाईकोर्ट पहुंच गया। याची के वकील ने तर्क दिया कि पूरे मामले में उनकी कोई भूमिका नहीं है और उनका नाम एफआईआर में भी नहीं था। हरियाणा सरकार ने तर्क दिया कि आरोपी क्षेत्र में सांप्रदायिक तनाव पैदा करना चाहते थे। अग्रिम जमानत की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता से हिरासत में पूछताछ आवश्यक है और अग्रिम जमानत देने का कोई आधार नहीं बनता है।
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