पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि जन्मतिथि विवाद में आधार से ज्यादा प्रमाणिक जन्म प्रमाण पत्र और दसवीं का सर्टिफिकेट है। मामला वैवाहिक विवाद से जुड़ा हुआ है, जिसमें पति-पत्नी ने आपसी सहमति से तलाक के लिए आवेदन किया था।
जब मामला लुधियाना की फैमिली कोर्ट पहुंचा तो बताया गया कि दोनों का विवाह 26 नवंबर 2004 को हुआ था। जज ने देखा कि पत्नी का जन्म 15 अगस्त 1987 को हुआ था। इसके अनुसार, विवाह के समय पत्नी 18 वर्ष की नहीं थी। कोर्ट ने इस आधार पर शादी को वैध न मानते हुए तलाक की अर्जी खारिज कर दी।
इसके बाद दोनों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए बताया कि आधार कार्ड पर जो तिथि लिखी गई है, उसके और असली तिथि में एक वर्ष का अंतर है।