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हाईकोर्ट का फैसला- शादी अवैध होने पर भी नहीं छिनता सुरक्षा का अधिकार, इसका ध्यान रखे पुलिस

Tue, 15 Oct 2019 10:26 AM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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फाइल फोटो
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एक मामले में सुनवाई करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि संविधान द्वारा दिया सुरक्षा का अधिकार अन्य अधिकारों से ऊपर है। कोर्ट ने कहा कि लड़का लड़की के बीच हुई शादी अवैध हो या शादी ही न हो तो भी सुरक्षा से इनकार नहीं किया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने एसएसपी मोहाली को दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं।
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रन अवे कपल ने पंचकूला में विवाह किया था और मोहाली पुलिस से सुरक्षा की मांग की थी। कपल की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि लड़की की उम्र 18 साल एक माह है जबकि लड़के की 20 साल है। दोनों के परिवार वाले उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहे हैं और ऐसे में उन्हें सुरक्षा मुहैया करवाई जाए।

इसके विरोध में लड़की के परिजनों ने कहा कि हिंदू मैरिज एक्ट के अनुसार लड़का शादी की न्यूनतम उम्र से भी छोटा है और ऐसे में उनकी शादी ही वैध नहीं है। जस्टिस अरूण मोंगा ने इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि संविधान ने सुरक्षा का अधिकार दिया है जो अन्य अधिकारों से बड़ा है।
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इस मामले में भले ही लड़का शादी की न्यूनतम उम्र को पार नहीं कर पाया है, लेकिन इससे उसकी सुरक्षा का अधिकार नहीं छिन जाता। कोर्ट ने कहा कि भले ही दोनों की शादी अवैध हो, अमान्य हो या शादी न हो तो भी सुरक्षा के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। इस टिप्पणी के साथ ही हाईकोर्ट ने मोहाली के एसएसपी को दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
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