पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने नेगोशिएबल इंस्टूमेंट एक्ट को लेकर पैदा हुए विवाद का निपटारा करते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि चेक पर धारक के हस्ताक्षर ही उसे वैध बनाने के लिए काफी हैं। याची ने कहा था कि चेक उसने नहीं भरा पर हस्ताक्षर उसके हैं ऐसे में इस भुगतान के लिए उसकी मंजूरी नहीं थी।
इस दलील को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि चेक कोई भी भरे यदि हस्ताक्षर मौजूद हैं तो इसे मंजूरी ही माना जाएगा। याचिका में फरीदकोट निवासी सुखजिंदर सिंह ने हाईकोर्ट को बताया कि एक चेक जिस पर उसके हस्ताक्षर थे, उसे क्लीयरेंस के लिए लगाया गया था।
चेक बाउंस होने के चलते बूटा सिंह ने उसके खिलाफ शिकायत दी और ट्रायल चल रहा था। ट्रायल कोर्ट में उसने मांग की थी कि चेक जिस हैंड राइटिंग में भरा गया है और याची की हेंड राइटिंग का मिलान कराया जाए। ट्रायल कोर्ट ने इस मांग को खारिज कर दिया था।