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हाईकोर्ट ने बदली दुष्कर्मी पिता की सजा: फांसी नहीं, अब 30 वर्ष का कारावास... नाबालिग बेटी के साथ किया था पाप

Wed, 23 Jul 2025 08:41 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

नाबालिग किशोरी ने 2020 में अपने पिता के खिलाफ दुष्कर्म की शिकायत दी थी। पलवल की कोर्ट ने दोषी को फांसी की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने इसे दुर्लभतम में दुर्लभ मामला न मानते हुए सजा को 30 साल के कारावास में बदल दिया।  
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अपनी 17 वर्षीय नाबालिग बेटी का यौन शोषण करने वाले व्यक्ति की माैत की सजा को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 30 वर्ष के कठोर कारावास में बदल दिया है। कोर्ट ने पिता को दोषी तो माना लेकिन इस मामले को दुर्लभतम में दुर्लभ मानने से इन्कार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि मौत की सजा के लिए यह उपयुक्त मामला नहीं है।
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2020 में पीड़िता ने अपने दादा-दादी के साथ पुलिस में शिकायत दर्ज की थी कि उसकी मां की मृत्यु के बाद उसके पिता ने वर्षों तक उसका यौन शोषण किया जिसके परिणामस्वरूप वह गर्भवती हो गई। आरोपी को तीन अक्तूबर 2020 को गिरफ्तार किया गया और उसने अपना अपराध कबूल किया था। पीड़िता ने बाद में एक बच्चे को जन्म दिया। 

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पलवल जिला कोर्ट ने 2023 में आरोपी को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। इसके बाद मामला हाईकोर्ट में पहुंचा, जहां दोषी ने दावा किया कि उसे फंसाया गया और पीड़िता से पैदा हुए बच्चे का पिता वह नहीं बल्कि पीड़िता का प्रेमी है। हाईकोर्ट ने अभियोजन पक्ष के चिकित्सीय साक्ष्यों और पीड़िता के बयान को मजबूत मानते हुए दोषी की अपील खारिज कर दी। 
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पीड़िता ने गवाही में स्पष्ट रूप से कहा कि उसके पिता ने चार वर्षों तक उसका यौन शोषण किया। डीएनए साक्ष्य ने भी पुष्टि की कि पीड़िता की सलवार पर मिला वीर्य और बच्चे का डीएनए दोषी से मेल खाता है। हाईकोर्ट ने यौन अपराधों से बालकों का संरक्षण (पोक्सो) अधिनियम की धारा छह और भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) की धारा 506 (II) के तहत दोषी की सजा को बरकरार रखा। हालांकि, मृत्युदंड को 30 वर्ष के कठोर कारावास में बदल दिया गया, जिसमें दोषी को समयपूर्व रिहाई का कोई लाभ नहीं मिलेगा। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियुक्त ने अपनी नाबालिग बेटी के साथ बार-बार यौन शोषण कर गंभीर अपराध किया, जिसके लिए सजा में किसी भी प्रकार की नरमी नहीं बरती जाएगी।
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