पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने फर्जी गारंटी के सहारे इंडियन ओवरसीज बैंक के अधिकारियों से मिलीभगत कर 321 करोड़ का फर्जीवाड़ा करने की आरोपी महिला को भगोड़ा करार देने के चंडीगढ़ जिला अदालत के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि बिना जमानती व गैर जमानती वारंट जारी किए भगोड़ा करार देने का आदेश देना गलत है। कोर्ट ने महिला को 21 दिन के भीतर ट्रायल कोर्ट के समक्ष पेश होने का आदेश दिया है।
321 करोड़ के फर्जीवाड़ा मामले में महिला सहआरोपी है। महिला को ट्रायल कोर्ट ने 9 मई 2019 को भगोड़ा करार दे दिया था। इस आदेश को महिला ने एडवोकेट सौरभ कपूर के जरिये हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका में कहा गया कि भगोड़ा करार देते हुए ट्रायल कोर्ट ने सीआरपीसी की धारा-82 का पालन नहीं किया। पहले आरोपी के खिलाफ जमानती और फिर गैर जमानती वारंट जारी नहीं किए गए। वैसे भी महिला जून 2018 को विदेश जा चुकी थी। तय प्रक्रिया का पालन किए बिना भगोड़ा करार दिया गया जो गलत है।
हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और पूरी प्रक्रिया और दस्तावेजों को देखने के बाद कहा कि महिला को भगोड़ा करार दिए जाते समय सीआरपीसी की धारा-82 का पालन नहीं किया गया है। ऐसे में भगोड़ा करार दिए जाने के आदेश सही नहीं है, इसे रद्द किया जाता है। महिला ने कहा कि वह फिलहाल विदेश में है और जल्द से जल्द ट्रायल कोर्ट के समक्ष पेश होने को तैयार है।