एक याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि अग्रिम जमानत का उद्देश्य निर्दोष व्यक्तियों को उत्पीड़न से बचाना है और यह केवल असाधारण परिस्थितियों में दी जानी चाहिए। लेकिन आजकल अग्रिम जमानत नियमित रूप से देना ट्रेंड बन गया है। इससे दोषी को कानून से बचने की ढाल मिल रही है, जो नहीं होना चाहिए।
हाईकोर्ट के जस्टिस एचएस मदान ने फरीदाबाद निवासी गगन इंदर सिंह की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की है। याची के खिलाफ एनआईटी फरीदाबाद में एक प्रसिद्ध सैलून की मालकिन को आत्महत्या के लिए मजबूर करने का आरोप है, जिसके तहत उस पर मुकदमा दर्ज किया गया। सैलून मालकिन ने 15 जून को फरीदाबाद में बीपीटीपी पुल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी।
बेंच ने कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ आरोप बहुत गंभीर हैं जिसने युवा महिला को आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया। पूर्ण और प्रभावी जांच के लिए उसकी हिरासत में पूछताछ आवश्यक है। ऐसे मामलों में अग्रिम जमानत देना जांच एजेंसी को सही जांच से वंचित करना है, जो जांच पर प्रतिकूल असर डाल सकता है। इस मामले में फरीदाबाद पुलिस द्वारा सेक्टर आठ की एक 63 वर्षीय महिला की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था।